औपनिवेशिक बेड़ियों से मुक्त हुई भारतीय सेना: 'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' में स्वदेशी पहचान को मिली नई उड़ान

विदा हुईं गुलामी की निशानियां; अब 'बंदी' जैकेट बढ़ाएगी आन-बान-शान, मूंछों से लेकर परफ्यूम तक के ग्रूमिंग रूल्स भी हुए सख्त।

14 Jun 2026  |  36

 

 

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी सदियों पुरानी औपनिवेशिक विरासत को पूरी तरह अलविदा कहते हुए पहनावे और ग्रूमिंग से जुड़े नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। नए जारी हुए 174 पन्नों के मैनुअल 'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' के तहत सेना ने कई ब्रिटिशकालीन परंपराओं को खत्म कर विशुद्ध भारतीय संप्रभु पहचान को अपनाया है। आठ साल बाद जारी हुए इस नए मैनुअल में न सिर्फ औपचारिक मौकों के लिए पारंपरिक 'बंदी' जैकेट को मंजूरी दी गई है, बल्कि सैनिकों के लुक, टैटू और कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल को लेकर भी बेहद कड़े और स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।

सेना के एडजुटेंट जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने मैनुअल की प्रस्तावना में कहा:

"यह संस्करण औपनिवेशिक दौर की बची-खुची प्रथाओं, साजो-सामान और शब्दावली को धीरे-धीरे हटाकर सेना के पहनावे को आज की भारतीय सोच के अनुरूप बनाने की दिशा में एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है।"

'बंदी जैकेट' को मिली आधिकारिक एंट्री, बदले कई नियम

पहली बार सेना ने अधिकारियों को फॉर्मल ड्रेस कोड के तौर पर स्वदेशी बंद-गले वाली 'बंदी जैकेट' पहनने की इजाजत दी है। इसे पूरी आस्तीन वाली शर्ट के ऊपर पहना जा सकता है। नियम के अनुसार, इस जैकेट का रंग सॉलिड और सोबर होना चाहिए और इसके साथ मैचिंग फॉर्मल ट्राउजर व बंद फॉर्मल जूते अनिवार्य होंगे।

यूनिफॉर्म में हुए ये मुख्य बदलाव:

पाउच बेल्ट की विदाई: राष्ट्रपति भवन, राजभवन या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में पहने जाने वाले 'मेस ड्रेस नंबर 5' और 'नंबर 6' से 'सेरेमोनियल पाउच बेल्ट' को हटा दिया गया है। हालांकि, कर्नल रैंक तक के चुनिंदा रेजिमेंटल कार्यक्रमों में यह केवल पारंपरिक तौर पर मान्य रहेगी।

तलवार अब वैकल्पिक: परेड के दौरान रिव्यूइंग (समीक्षा करने वाले) अधिकारियों के लिए अब तलवार साथ रखना वैकल्पिक कर दिया गया है।

सर्दियों के लिए नई वर्दी: सभी रैंक के सैनिकों के लिए '3बी' नाम की विंटर ड्रेस शुरू की गई है, जिसमें अंगोला शर्ट के साथ बैटल जैकेट और बेरेट (टोपी) शामिल है।

शब्दावली में बदलाव: सेना के नियमों से ‘रॉयल’ जैसे पुराने औपनिवेशिक शब्दों को भी पूरी तरह हटा दिया गया है।

महिला अधिकारियों के लिए गरिमापूर्ण ड्रेस कोड

नए नियमों के तहत महिला सैन्य अधिकारी औपचारिक मौकों पर सादे रंगों की साड़ियां या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और टखने तक की लंबाई वाली सीधी पैंट पहन सकेंगी। हालांकि, बिना आस्तीन (स्लीवलेस) वाले कुर्ते, पलाजो या सिगरेट पैंट जैसे कैज़ुअल कपड़े पहनने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

ग्रूमिंग स्टैंडर्ड: टैटू, परफ्यूम और मूंछों पर कड़े निर्देश

'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' में सैनिकों के ग्रूमिंग स्टैंडर्ड को लेकर बेहद सख्त हिदायत दी गई है:

टैटू और पियर्सिंग: शरीर पर किसी भी तरह के टैटू या पियर्सिंग (छेद करवाने) की सख्त मनाही है।

धार्मिक चिह्न व ब्रेसलेट: यूनिफॉर्म में सैनिक किसी भी तरह का ब्रेसलेट नहीं पहन सकते। कलाई पर सिर्फ पूजा का पवित्र धागा (कलावा) बांधने की अनुमति है। सिख सैनिकों को छोड़कर किसी भी अन्य धार्मिक चिह्न को प्रदर्शित करने की इजाजत नहीं होगी।

मूंछों की लंबाई: सैनिकों की मूंछें 12 सेंटीमीटर से ज्यादा लंबी नहीं होनी चाहिए।

परफ्यूम पर बैन: ड्यूटी के दौरान डिओडोरेंट और परफ्यूम के इस्तेमाल पर रोक रहेगी, हालांकि आफ्टर-शेव लोशन लगाया जा सकता है।

महिला कर्मियों के लिए कॉस्मेटिक्स नियम: महिला कर्मियों के लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन लगाने पर रोक है। सिंदूर लगाने की अनुमति है, लेकिन वह इस तरह लगाया जाए कि बेरेट या पीक कैप पहनने पर बाहर दिखाई न दे।

पीएम मोदी के 'पंच प्रण' का असर

सेना में स्वदेशीकरण की यह मुहिम पांच साल पहले तब तेज हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में 'कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' को संबोधित किया था। उन्होंने सशस्त्र बलों को औपनिवेशिक रीति-रिवाजों को खत्म कर अपने सिद्धांतों और प्रक्रियाओं में भारतीय तौर-तरीकों को अपनाने का निर्देश दिया था। यह नया मैनुअल उसी 'पंच प्रण' और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति के संकल्प का जीता-जागता उदाहरण है।

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