चंडीगढ़। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट से करारी शिकस्त मिलने के बाद अब चंडीगढ़ प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन को साल 2015 बैच के करीब 800 कार्यरत शिक्षकों को आगामी 31 जुलाई तक ₹100 करोड़ के बकाया एरियर (वित्तीय लाभ) का भुगतान करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत साक्ष्यों के अभाव में पेपर लीक में शिक्षकों की संलिप्तता साबित नहीं होती है। ऐसे में उनका प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) क्लियर माना जाए और उन्हें सभी नियमित आर्थिक लाभ दिए जाएं। इस ऐतिहासिक फैसले से जहाँ पिछले 9 सालों से मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे शिक्षकों में खुशी की लहर है, वहीं दो महीने के भीतर इतनी बड़ी राशि का प्रबंध करने को लेकर प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।
क्या है पूरा मामला? 2017 से अब तक का सफर
2015 में भर्ती: पंजाब सेवा नियमों के तहत चंडीगढ़ प्रशासन ने 1149 शिक्षकों की भर्ती की थी। नियमानुसार जुलाई-अगस्त 2017 में इनका प्रोबेशन पीरियड क्लियर होना था।
2017 में पेपर लीक का साया: मई 2017 में इस भर्ती में पेपर लीक होने की बात सामने आई, जिसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में सभी 1149 शिक्षकों की भर्ती को ही रद्द कर दिया।
अदालती लड़ाई: मामला कैट (CAT) पहुंचा, जिसने आदेश दिया कि केवल आरोपियों को बाहर कर भर्ती प्रक्रिया जारी रखी जाए। प्रशासन इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट गया, लेकिन हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी।
लड़ाई के बीच छूटी नौकरी: कोर्ट केस और प्रशासनिक अनिश्चितता के चलते इस दौरान 300 से ज्यादा शिक्षक नौकरी छोड़ चुके हैं। फिलहाल केवल 800 शिक्षक ही सेवा में कार्यरत हैं।
कैट का अल्टीमेटम और किश्तों में भुगतान की मजबूरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाते हुए कैट ने 22 मई को चंडीगढ़ प्रशासन को 31 जुलाई तक हर हाल में ₹100 करोड़ का एरियर जारी करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इतनी बड़ी रकम का एकमुश्त इंतजाम करना नामुमकिन दिख रहा है, इसलिए प्रशासन इस एरियर का भुगतान 3 से 4 किश्तों में करने की योजना बना रहा है।
प्रोबेशन पर सस्पेंस बरकरार: आर्थिक लाभ देने की तैयारी तो शुरू हो गई है, लेकिन प्रोबेशन पीरियड को नियमित करने के मामले पर फिलहाल कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इस फाइल को कानूनी राय (लीगल ओपिनियन) के लिए भेजा गया है।
बढ़ सकती है प्रशासन की मुश्किलें, ₹20 करोड़ का अतिरिक्त बोझ संभव
प्रशासन की वित्तीय चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। विभाग में करीब 150 कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) और गेस्ट फैकल्टी शिक्षक भी कार्यरत हैं, जिन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही एरियर देने का आदेश दे चुके हैं।
इन्हीं फैसलों के आधार पर अब इन 150 शिक्षकों ने भी कैट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर 3 जुलाई को सुनवाई होनी है। यदि कोर्ट का फैसला इन शिक्षकों के पक्ष में आता है, तो प्रशासन पर करीब ₹20 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और कुल भुगतान की राशि बढ़कर ₹120 करोड़ हो जाएगी।