सिलिकॉन वैली।
दुनिया के पहले ट्रिलियनियर, स्पेस एक्सप्लोरेशन के प्रणेता और हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा IPO लॉन्च करने वाले एलन मस्क इन दिनों अपनी बेहिसाब दौलत से ज्यादा आबादी बढ़ाने यानी 'प्रोनैटलिज्म' (Pro-natalism) को लेकर चर्चा में हैं। करीब एक दर्जन बच्चों के पिता मस्क का पक्का मानना है कि दुनिया के समझदार और जीनियस लोगों को समाज की भलाई के लिए ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। इस मकसद को पूरा करने के लिए वे 'स्पर्म डोनेशन' को एक बेहतरीन और असरदार जरिया मानते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्क की सोच कुछ हद तक 'नॉर्दर्न एलिफेंट सील' जैसी है, जो बेधड़क अपनी आबादी बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। यहाँ तक कि न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मस्क ने सिलिकॉन वैली की एक डिनर पार्टी में एक कपल को अपना स्पर्म डोनेट करने का ऑफर तक दे दिया था, हालाँकि मस्क ने बाद में इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।
विज्ञान का बड़ा सवाल: क्या जीनियस पिता का बच्चा जीनियस होगा?
मस्क की इस 'मस्कियन सोच' के सामने सबसे बड़ा सवाल खुद विज्ञान ही खड़ा करता है। वैज्ञानिक रिसर्च और अनुवांशिकी (Genetics) के अनुसार:
वैज्ञानिक तथ्य: बच्चों में बुद्धिमत्ता (Intelligence) ट्रांसफर होने के मामले में पिता से कहीं ज्यादा माँ के जीन्स की भूमिका होती है। इसलिए यह कतई जरूरी नहीं है कि किसी जीनियस पिता के स्पर्म से पैदा होने वाला बच्चा भी उतना ही कुशाग्र बुद्धि का हो।
कानूनी अड़चन: 'गुमनामी' बनाम 'पहचान' का पेच
मस्क और उनके जैसे तमाम ऐसे संभावित डोनर्स जो चाहते हैं कि दुनिया को पता चले कि उनके स्पर्म से बच्चे पैदा हुए हैं, उनके सामने सबसे बड़ी कानूनी दीवार 'डोनर प्राइवेसी' की है।
गोपनीयता का नियम: दुनिया के अधिकांश हिस्सों में स्पर्म डोनर की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है। न तो माता-पिता को डोनर का नाम पता चलता है और न ही डोनर कानूनी तौर पर अपनी पहचान जाहिर कर सकता है।
भारत का रुख: भारत में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) की गाइडलाइंस के मुताबिक डोनर की पहचान को शत-प्रतिशत गुप्त रखना अनिवार्य है।
कहाँ मिल सकती है मस्क को छूट?
यदि कोई डोनर अपनी पहचान उजागर करना चाहता है, तो उसे उन देशों का रुख करना होगा जहाँ कानूनन माँ और बच्चे को डोनर की पहचान जानने का अधिकार है।
स्वीकार्य देश/राज्य: यूके, जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और अमेरिका के कुछ राज्य (जैसे कैलिफोर्निया, रोड आइलैंड, कनेक्टिकट)।
मस्क के लिए क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
दुनिया के सबसे अमीर और रसूखदार इंसान होने के बावजूद मस्क के लिए स्पर्म बैंक का हिस्सा बनना आसान नहीं है:
कड़े नियम व पूछताछ: अधिकांश देशों में डोनर बनने के लिए बेहद कड़े मेडिकल टेस्ट्स, विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड और बेहद निजी व अजीबोगरीब सवालों के दौर से गुजरना पड़ता है। मस्क जैसे ताकतवर व्यक्ति को ऐसी पूछताछ की आदत नहीं होगी।
इनब्रीडिंग (Inbreeding) का खतरा: यदि एक ही डोनर के स्पर्म से कई बच्चे पैदा होते हैं, तो भविष्य में अनजाने में उन सौतेले भाई-बहनों के बीच शादी या संबंध का खतरा बढ़ जाता है, जो बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसी वजह से देश स्पर्म डोनेशन की एक अधिकतम सीमा तय करते हैं।
DNA टेस्टिंग खोल सकती है राज
भले ही कानून पहचान छुपाने की वकालत करे, लेकिन आज के दौर में तकनीकी प्रगति ने इसे बदल दिया है। आजकल बेहद आसान और सुलभ हो चुकी DNA टेस्टिंग की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे सौतेले भाई-बहन न सिर्फ आपस में जुड़ सकते हैं, बल्कि वे आसानी से अपने जैविक पिता (जैसे इस मामले में एलन मस्क) तक भी पहुँच सकते हैं।
अब देखना यह है कि दौलत के शिखर पर बैठे मस्क इस कानूनी और वैज्ञानिक चक्रव्यूह को भेदकर अपने इस अनोखे मिशन को कैसे आगे बढ़ाते हैं।