वैश्विक बाज़ारों में राहत: अमेरिका-ईरान समझौते से खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, भारत में घटेंगे तेल के दाम और महंगाई!

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में थमा युद्ध का तूफान; 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' खुलने से भारत को मिलेगी माल ढुलाई और कच्चे तेल की कीमतों में भारी राहत।

15 Jun 2026  |  127

 

 

नई दिल्ली / वाशिंगटन:

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव आखिरकार एक ऐतिहासिक समझौते में बदल गया है। आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच इस शांति समझौते (डील) पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और व्यापार बहाल करने का बड़ा एलान किया गया है।

इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे सकारात्मक असर भारत पर पड़ने की उम्मीद है, जिससे देश को तेल आपूर्ति, माल ढुलाई लागत और महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी।

क्यों अहम है 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'?

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है।

वैश्विक तेल का पांचवां हिस्सा: दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

खाड़ी देशों का मुख्य मार्ग: सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात का यह मुख्य रास्ता है।

भारत के लिए महत्व: ये सभी खाड़ी देश भारत को ऊर्जा (क्रूड ऑयल और गैस) सप्लाई करने वाले सबसे अहम साझेदार हैं।

गौरतलब है कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने के कारण इस मार्ग से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई थी। अब तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी।

डोनाल्ड ट्रंप का एलान: "दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो!"

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस युद्धविराम समझौते की घोषणा करते हुए एक बेहद कड़ा और सकारात्मक संदेश दिया। ट्रंप ने लिखा:

"मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!"

इस एलान के तुरंत बाद रविवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट

युद्धविराम की खबर आते ही ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

याद दिला दें कि फरवरी में युद्ध की शुरुआत से पहले कच्चा तेल 70-72 डॉलर प्रति बैरल था, जो सप्लाई रुकने के बाद आसमान छूते हुए 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस गिरावट से अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं।

भारतीय उपभोक्ताओं और तेल कंपनियों को कैसे मिलेगा फायदा?

चरणप्रभाव और वर्तमान स्थिति
लागत में कमीअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने से भारतीय रिफाइनरियों के लिए पेट्रोल-डीजल बनाने की लागत काफी कम हो जाएगी।
कंपनियों का घाटा कम होगावर्तमान में कीमतें लागत से कम होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 650 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। क्रूड सस्ता होने से यह घाटा खत्म होगा।
महंगाई से राहतमाल ढुलाई (Freight Cost) का खर्च घटने से देश में रोजमर्रा की चीजों और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी, जिससे आम जनता को महंगाई से सीधी राहत मिलेगी।

 

चुनावी गणित और घरेलू कीमतों का सफर

इससे पहले, घरेलू बाजार में सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया था। पांच राज्यों (पश्चिम बंगाल सहित) में विधानसभा चुनावों के दौरान जनता को बढ़ोतरी से बचाने के लिए सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।

हालांकि, चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर, सीएनजी (CNG) में 6 रुपये प्रति किलोग्राम और घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर दो किस्तों में 89 रुपये की बढ़ोतरी की थी।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने और कच्चे तेल की कीमतों में आई इस नरमी के बाद, भारतीय तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में धीरे-धीरे कटौती देखने को मिल सकती है।

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