डीजल पर ₹14 और ATF पर ₹12.5 प्रति लीटर हुई एक्सपोर्ट ड्यूटी: पेट्रोल को राहत, सरकार ने चली 'विंडफॉल' चाल

पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा किया रुख; नई दरें आज से लागू।

16 Jun 2026  |  107

 

 

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क) में बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, संशोधित दरें आज यानी 16 जून से अगले 15 दिनों की अवधि के लिए प्रभावी हो गई हैं।

क्या हैं नई दरें? (एक नजर में)

निर्यात शुल्कों में किए गए बदलावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

ईंधन का प्रकारपुरानी दर (प्रति लीटर)नई दर (प्रति लीटर)बदलाव
डीजल (Diesel)₹13.5₹14.050 पैसे की बढ़ोतरी
एटीएफ (ATF - हवाई ईंधन)₹9.5₹12.5₹3.00 की भारी बढ़ोतरी
पेट्रोल (Petrol)₹1.5₹1.5कोई बदलाव नहीं (स्थिर)

 

आम जनता के लिए राहत: सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार (देश के भीतर) में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए, स्थानीय स्तर पर कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

क्यों उठाया गया यह कदम?

इस टैक्स संशोधन के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता: सरकार का मुख्य फोकस रिफाइनरी कंपनियों को घरेलू बाजार की अनदेखी कर विदेशी बिक्री (निर्यात) को प्राथमिकता देने से रोकना है।

अत्यधिक मुनाफे पर लगाम: पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इस कर का उद्देश्य उन निर्यातकों को हतोत्साहित करना है जो वैश्विक संकट का फायदा उठाकर अनुचित रूप से अत्यधिक मुनाफा (विंडफॉल गेन) कमा रहे हैं।

एहतियाती रणनीति: हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन यह अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में सरकार जोखिम नहीं उठाना चाहती और देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना चाहती है।

मार्च से जारी है कड़ी निगरानी

गौरतलब है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पश्चिम एशिया के संघर्ष के असर को देखते हुए सरकार ने पहली बार इस साल मार्च में डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाया था। तब से लेकर अब तक, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव के आधार पर हर 15 दिनों में इन दरों की समीक्षा और संशोधन किया जाता रहा है।

यह कदम दर्शाता है कि सरकार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय उपभोक्ताओं और घरेलू उद्योगों को ऊर्जा संकट से बचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

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