नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में करवट ले रही जलवायु संबंधी वैश्विक घटना 'अल नीनो' (El Niño) का नया दौर शुरू हो चुका है। इसके दस्तक देते ही संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने भारत सहित समूचे एशिया महाद्वीप के लिए एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। एफएओ के अनुसार, अल नीनो के इस नए चक्र से कृषि क्षेत्र और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को तगड़ा झटका लग सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में इस बार मानसूनी बारिश सामान्य से काफी कम रह सकती है, जिसका सीधा असर धान, मक्का और अन्य वर्षा आधारित खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा।
सूखे की मार: इन 9 देशों पर सबसे ज्यादा खतरा
एफएओ ने पिछले 41 वर्षों की उपग्रह (सैटेलाइट) तस्वीरों और जलवायु आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया के निम्नलिखित देशों में सूखे का खतरा सबसे अधिक मंडरा रहा है:
भारत और पाकिस्तान
म्यांमार, थाईलैंड और कंबोडिया
वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते
इन देशों में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर रहने वाले करोड़ों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित होने की आशंका है।
फसलों की वृद्धि के समय रूठेगा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों और कृषि जानकारों के मुताबिक, मानसून के कमजोर पड़ने से खेतों को मिलने वाली आवश्यक नमी में भारी कमी आएगी। जब फसलें अपनी वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण चरण में होंगी, ठीक उसी समय पानी की किल्लत उत्पादन पर भारी दबाव बनाएगी।
2015-16 का कड़वा अनुभव: रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि साल 2015-16 में आए अल नीनो के कारण भारत में मक्का के उत्पादन में 4 फीसदी और धान के उत्पादन में 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इस बार का संकट और गहरा हो सकता है।
वैश्विक खाद्य बाजार में बढ़ सकती है महंगाई
संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने साफ किया है कि अल नीनो का यह असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्यान्न उत्पादन घटने से वैश्विक स्तर पर अनाज की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित होगी। आपूर्ति कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे कई विकासशील देशों को अनाज आयात करने के लिए भारी-भरकम रकम खर्च करनी होगी।
इस बार ज्यादा खतरनाक क्यों है अल नीनो?
एफएओ के प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जार्ज अल्वार-बेल्ट्रान ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा:
"कम बारिश का सबसे पहला और सीधा प्रहार गरीब किसानों पर होता है। फसलें बर्बाद होने के बाद पशुधन और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था संकट के दलदल में फंस जाती है। इस बार का अल नीनो पहले के मुकाबले कहीं अधिक गंभीर साबित हो सकता है, क्योंकि वैश्विक तापमान (Global Temperature) पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है और दुनिया के कई देश पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।"
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