UNSC में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत का आर-पार का रुख: संयुक्त राष्ट्र के 'एलिमेंट्स पेपर' को बताया पक्षपातपूर्ण, कहा- अब केवल बातों से काम नहीं चलेगा

स्थापना के 80वें साल में कदम रख रहे संयुक्त राष्ट्र को भारत की दो टूक; स्थायी सीटों के लिए वैश्विक बहुमत को कम आंकने का लगाया आरोप, तय समय सीमा में औपचारिक वार्ता शुरू करने की मांग।

16 Jun 2026  |  91

 

 

न्यूयॉर्का/नई दिल्ली।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर भारत ने अब तक का सबसे कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए तैयार किए गए हालिया 'एलिमेंट्स पेपर' (प्रस्ताव के मसौदे) की तीखी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और त्रुटिपूर्ण करार दिया है। भारत का साफ तौर पर कहना है कि इस दस्तावेज में सदस्य देशों की राय को गलत तरीके से पेश किया गया है और सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के विस्तार को मिलने वाले भारी वैश्विक समर्थन को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने सोमवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में भारत का पक्ष बेहद आक्रामक ढंग से रखा और इस भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ कड़े सवाल उठाए।

शीत युद्ध के जमाने का पुराना ढांचा

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आज के दौर में भी 'शीत युद्ध' के जमाने के पुराने ढांचे पर चल रही है, जो आज की वैश्विक वास्तविकताओं से कोसों दूर है। वर्तमान में इसके 5 स्थायी सदस्यों (P5)—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—के पास 'वीटो पावर' है। आलोचकों और भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों का मानना है कि यह वीटो पावर आज की दुनिया की सच्चाई और विकासशील देशों (Global South) की आवाज को दबाने का काम करती है। इसी व्यवस्था को बदलने के लिए भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील (G4 समूह) समेत पूरा अफ्रीकी महाद्वीप लंबे समय से सुधारों की मांग कर रहा है।

भारत ने इन प्रमुख बिंदुओं पर जताई कड़ी आपत्ति:

जल्दबाजी और कम समय: राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि यह पेपर 10 जून को जारी किया गया और सदस्य देशों को इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए मात्र दो कार्य दिवस (Working Days) का समय दिया गया, जो इतने संवेदनशील विषय के लिए बेहद कम था।

बहुमत को जानबूझकर कम आंकना: भारत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि जहाँ दुनिया के बहुसंख्यक देश (G4, अफ्रीकी देश और छोटे द्वीपीय देश) सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटें बढ़ाने के पक्ष में हैं, वहीं इस पेपर में इस भारी बहुमत को जानबूझकर 'कुछ देशों का समर्थन' कहकर हल्का और खारिज करने का प्रयास किया गया।

'रीजनल सीट्स' का प्रस्ताव खारिज: पेपर में स्थायी सदस्यता बढ़ाने के लिए 'फिक्स्ड रीजनल सीट्स' (क्षेत्रीय सीटें) का एक प्रस्ताव दिया गया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। भारत का तर्क है कि इससे वास्तविक स्थायित्व नहीं आएगा और यह छोटे देशों के हितों को चोट पहुंचाएगा।

अब सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा: भारत की दो टूक

भारत ने संयुक्त राष्ट्र से साफ शब्दों में मांग की है कि अब केवल अंतहीन बैठकों और अनौपचारिक चर्चाओं का दौर बंद होना चाहिए। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सुधारों के लिए अब एक औपचारिक 'नेगोशिएटिंग टेक्स्ट' (वार्ता पाठ) तैयार किया जाए, जिस पर सभी देश सीधे और पारदर्शी तौर पर बातचीत कर सकें। साथ ही, इस काम को पूरा करने की एक निश्चित समय सीमा (डेडलाइन) तय की जाए। राजदूत पर्वथनेनी ने चेतावनी दी कि जो देश वैश्विक सुधारों को रोकना चाहते हैं, वे नियमों की आड़ में इस प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए लटकाने की कोशिश न करें।

80वीं सालगिरह पर साख बचाने की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना की 80वीं वर्षगांठ के मुहाने पर खड़ा है और ऐसे समय में इस वैश्विक संस्था की प्रासंगिकता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को हुई इस बैठक से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि दुनिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत अब किसी भी तरह के आधे-अधूरे उपायों या टालमटोल को स्वीकार करने के मूड में नहीं है और वह सुरक्षा परिषद में अपनी न्यायसंगत स्थायी जगह के लिए पूरी मजबूती से अड़ गया है।

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