कड़ा कानून, कानूनी घेरे में खाकी! MP के 2 थाना प्रभारियों समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश, वीडियोग्राफी का दावा भी निकला झूठा

राजस्थान कोर्ट का बड़ा एक्शन: ₹5 करोड़ की ड्रग्स जब्ती की '30 मिनट' वाली कार्रवाई निकली संदिग्ध, ₹10 लाख मांगने और झूठे केस में फंसाने का आरोप; वीडियोग्राफी का दावा भी निकला झूठा। 2 थाना प्रभारियों समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश |

16 Jun 2026  |  115

 

झालावाड़ (राजस्थान)।

मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर मादक पदार्थों (ड्रग्स) की जब्ती को लेकर की गई एक बड़ी पुलिसिया कार्रवाई अब खुद गंभीर कानूनी घेरे में आ गई है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने मध्य प्रदेश की आगर मालवा पुलिस द्वारा की गई ₹5 करोड़ की ड्रग्स जब्ती की कार्रवाई को पूरी तरह संदिग्ध माना है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद एमपी पुलिस के दो थाना प्रभारियों (TI) और उप-निरीक्षकों सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं। दो राज्यों की पुलिस और न्यायपालिका के बीच का यह संभवतः ऐसा पहला मामला है, जिसने दोनों प्रदेशों के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

इन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ केस

चौमहला कोर्ट के आदेश पर राजस्थान की झालावाड़ पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के जिन अधिकारियों पर मामला दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं:

तत्कालीन आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशी उपाध्याय

बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस

उप-निरीक्षक (SI) राखी गुर्जर

सहायक उप-निरीक्षक (ASI) अजय जाट

पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा और शुभम समेत पूरी छापेमारी टीम (लगभग 100 पुलिसकर्मी)

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद इस साल की शुरुआत में तब पैदा हुआ, जब मध्य प्रदेश की आगर कोतवाली पुलिस ने 28 जनवरी 2026 को राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घाटाखेड़ी गांव में एक बड़ी छापेमारी की। एमपी पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने वहां से करीब ₹5 करोड़ मूल्य की एमडी (MD) ड्रग्स, स्मैक और हथियार बरामद किए हैं।

कार्रवाई के दौरान एमपी पुलिस ने स्थानीय डग थाना पुलिस को फोन पर केवल यह बताया कि कुछ महिलाएं उनके साथ अभद्रता कर रही हैं, लेकिन उन्होंने न तो अपनी सटीक लोकेशन बताई और न ही किसी भी तरह की स्थानीय मदद की मांग की।

30 मिनट का 'खेल' और सीसीटीवी ने खोली पोल

इस कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए शाहिर खान और मनोवर खान के पिता हमीद खान ने न्याय के लिए चौमहला कोर्ट में एक परिवाद (इस्तगासा) दायर किया। हमीद खान ने आरोप लगाया कि एमपी पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए उनके घरों में घुसकर तोड़फोड़ की और उनके बेटों को झूठे मामले में फंसाया।

कोर्ट के आदेश पर जब मामले की तकनीकी जांच की गई, तो एमपी पुलिस का पूरा दावा ताश के पत्तों की तरह ढह गया:

समय की विसंगति: गांव के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में केवल 30 मिनट ही रुके थे। अदालत और जांच अधिकारी ने माना कि एनडीपीएस (NDPS) एक्ट जैसे कड़े कानून के तहत तलाशी, जब्ती, पंचनामा और गिरफ्तारी जैसी लंबी कानूनी प्रक्रियाओं को महज 30 मिनट में पूरा करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है।

झूठे दावे: पुलिस ने जांच में वीडियोग्राफी करने का जो दावा किया था, वह पूरी तरह झूठा निकला। इसके अलावा जब्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण आधिकारिक रिकॉर्ड भी गायब मिले।

₹10 लाख की रिश्वत मांगने का संगीन आरोप

पीड़ित पिता हमीद खान ने कोर्ट को बताया कि छापेमारी के दौरान एमपी पुलिस ने उनसे ₹10 लाख की मोटी रकम की मांग की थी। जब उन्होंने खुद को गरीब किसान बताते हुए असमर्थता जताई, तो पुलिस उनके दोनों बेटों को जबरन पकड़कर आगर ले गई।

पीड़ित का आरोप है कि घर की तलाशी में एक ग्राम ड्रग्स भी नहीं मिली थी, केवल एक लाइसेंसी एकनाली बंदूक, एक एयर गन और सात मोबाइल मिले थे। लेकिन आगर थाने ले जाकर पुलिस ने अपनी मर्जी से 2 किलो एमडी, 1 किलो स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम और 2 राइफलें दर्शाते हुए ₹5 करोड़ की फर्जी जब्ती का केस ठोक दिया।

दोनों राज्यों में चर्चा का विषय

तकनीकी साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर चौमहला कोर्ट ने खाकी की इस मनमानी पर कड़ा प्रहार करते हुए पूरी टीम पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद सीमावर्ती इलाकों में अवैध रूप से दबिश देने वाली पुलिस टीमों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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