मध्य प्रदेश: गेहूं की बोरियों में मिली 90% तक मिट्टी, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्देश पर सहायक आपूर्ति अधिकारी सस्पेंड, FIR दर्ज

अन्नदाताओं के हक पर डाका! देव प्रभाकर वेयरहाउस में 600 बोरियों में गेहूं की जगह निकली मिट्टी और कंकड़; जिला आपूर्ति नियंत्रक को पद से हटाया; अन्य विभागों पर भी गिरेगी गाज।

16 Jun 2026  |  69

 

सागर।

मध्य प्रदेश के सागर जिले में गेहूं उपार्जन (खरीदी) के दौरान किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ और भ्रष्टाचार का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी गोदाम में रखी गेहूं की बोरियों में अनाज की जगह भारी मात्रा में मिट्टी और कंकड़ मिलाए जाने की शिकायत सही पाई गई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपने गृह जिले सागर में हुए इस घपले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को तत्काल और सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मंत्री के कड़े तेवर के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। वहीं, जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल को सागर जिले के प्रभार से हटाकर भोपाल मुख्यालय अटैच (उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश) कर दिया गया है।

बोरियों में गेहूं गायब, 30 से 90 फीसदी तक भरी थी मिट्टी

यह पूरा गोरखधंधा सागर जिले के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के 'देव प्रभाकर वेयरहाउस' (गोदाम) का है। हाल ही में प्रशासन को शिकायत मिली थी कि यहाँ रखे गेहूं में बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। जब प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रारंभिक जांच की, तो अधिकारी भी हैरान रह गए।

जांच में चौंकाने वाला खुलासा:

वेयरहाउस में रखी करीब 600 बोरियों की जांच की गई, जिसमें गेहूं के स्थान पर अत्यधिक मात्रा में मिट्टी और कंकड़ पाए गए। कई बोरियों में तो मिलावट का यह स्तर 30 से लेकर 90 फीसदी तक पाया गया, यानी गेहूं के नाम पर सिर्फ मिट्टी भरी गई थी।

स्व-सहायता समूह पर आपराधिक केस (FIR) दर्ज

खाद्य मंत्री के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए संबंधित उपार्जन केंद्र का संचालन करने वाले स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज करा दिया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें इस पूरे सिंडिकेट और घोटाले की कड़ियों को जोड़ने के लिए विस्तृत जांच कर रही हैं।

अन्य जिम्मेदार विभागों पर भी गिरेगी गाज

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कलेक्टर को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस घोटाले की आंच केवल खाद्य विभाग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने उपार्जन प्रक्रिया और निगरानी से जुड़े अन्य सभी विभागों के कर्मचारियों की भूमिका की भी सघन जांच करने के आदेश दिए हैं।

मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा, "किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी हाड़-तोड़ मेहनत और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी भ्रष्टाचारी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। गेहूं खरीदी में हुई यह गड़बड़ी देश के अन्न भंडार के साथ कूटरचना है। इस नेटवर्क में शामिल हर एक छोटे-बड़े अधिकारी, कर्मचारी या संस्था के खिलाफ ऐसी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।"

निगरानी व्यवस्था होगी और मजबूत

सरकार ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रदेश के सभी उपार्जन केंद्रों और वेयरहाउसों की सुरक्षा व निगरानी व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत किया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य वेयरहाउस संचालकों और विपणन से जुड़े अधिकारियों में भी हड़कंप का माहौल है।

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