अयोध्या / लखनऊ।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस विवाद पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा बयान दिया है। अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को 'महापाप और महाघोटाला' करार देते हुए सवाल उठाया है कि अयोध्या में इस कृत्य के पीछे आखिर कौन सा 'सनातन विरोधी गिरोह' काम कर रहा है, इसकी गहरी पड़ताल होनी चाहिए।
सपा प्रमुख के इस हमले और विपक्ष के चौतरफा दबाव के बीच, शासन द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने मंदिर परिसर पहुंचकर अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है।
"आगे-आगे देखिए होता है क्या" — अखिलेश यादव का सोशल मीडिया पर तंज
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए सरकार और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा:
"आगे-आगे देखिए होता है क्या... चढ़ावे से बात चंदे तक पहुंची और चंदे से जमीन तक, और अब जमीन से अति बहुमूल्य अरबों रुपयों की 'श्रीराम शिलाओं' के गायब होने तक। भाजपाइयों के अनरजिस्टर्ड और अंडरग्राउंड संगी-साथियों की अविलंब केवाईसी (KYC) करवाई जानी चाहिए।"
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में एक वीडियो का भी हवाला दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश (विशेषकर मॉरीशस) से आई लगभग 1,250 बहुमूल्य, सोने-चांदी और रत्नों से जड़ित श्रीराम शिलाएं गायब हो चुकी हैं और वर्तमान में उनका कोई हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है।
थाने पहुंची शिकायत: आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर हेरफेर का दावा
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब संतोष दुबे नामक व्यक्ति ने अयोध्या के रामजन्मभूमि थाने में एक लिखित तहरीर (शिकायत) दी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर के दान-पात्र में रोजाना भारी मात्रा में सोना, चांदी, कीमती आभूषण और नकदी समर्पित की जाती है। इस चढ़ावे और बहुमूल्य संपत्तियों के प्रबंधन व रखरखाव में बड़े स्तर पर अनियमितताएं और गबन किया जा रहा है।
तीन सदस्यीय हाई-प्रोफाइल SIT कर रही है जांच
विपक्ष के भारी हंगामे और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया है। इस टीम में:
वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी विजय विश्वास पंत
आईपीएस (IPS) अधिकारी एस. किरण
वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
एसआईटी की टीम लगातार राम मंदिर परिसर का दौरा कर साक्ष्य जुटा रही है। जांच के सिलसिले में अब तक 40 से अधिक लोगों से गहन पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े लोग शामिल हैं।
"राम के नाम पर दुकान चलाने वालों की संगठित लूट" — कांग्रेस का हमला
सपा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को पूरी ताकत से घेरा है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एसआईटी के गठन पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने कहा, "SIT की जांच करने वाले वही अधिकारी हैं, जो महाकुंभ में भगदड़ के वक्त कमिश्नर थे। मंदिर के चढ़ावे में चोरी कोई आम बात नहीं, बल्कि एक संगठित लूट है। इसमें वो बड़े लोग शामिल हैं, जिनकी नियुक्तियां सीधे प्रधानमंत्री स्तर से हुई हैं।" अजय राय ने मांग की है कि इस पूरे घोटाले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में समयबद्ध (Time-bound) तरीके से कराई जाए।
वहीं, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आराधना मिश्रा ने इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ क्रूर खिलवाड़ बताते हुए कहा कि 1250 बेशकीमती श्रीराम शिलाओं का गायब होना बेहद गंभीर और निंदनीय है।
फिलहाल, एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट आने से पहले इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है और आने वाले दिनों में इस पर टकराव और बढ़ने के आसार हैं।