भोपाल।
मध्य प्रदेश में तबादला नीति (Transfer Policy) के अंतिम दिन मंत्रालयों और प्रशासनिक हलकों में एक अनोखा और दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के दौरान पहले तो तबादलों की समय-सीमा बढ़ाने की मंत्रियों की मांग को सख्ती से खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में एक अन्य मंत्री के तार्किक आग्रह पर उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। मुख्यमंत्री की इस विशेष मंजूरी के बाद मंगलवार की देर रात तक पूरे प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी होते रहे।
कैबिनेट बैठक में जब सीएम ने दिखाई सख्ती
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति का समय बढ़ाने को लेकर मंत्रियों के बीच चर्चा शुरू हुई।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मांग: सबसे पहले मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि 1 से 15 जून के बीच का समय पर्याप्त नहीं रहा। कई जरूरी प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं, इसलिए समय थोड़ा और बढ़ाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री का दो टूक जवाब: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मांग को स्पष्ट शब्दों में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अंतिम तिथि पहले से तय थी और अब इसे किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
फिर इंदर सिंह परमार की 'मास्टर स्ट्रोक' दलील ने पलटी बाजी
जब ऐसा लगा कि अब तबादलों का पोर्टल बंद हो जाएगा, तभी बैठक में मंत्री इंदर सिंह परमार ने मामले को एक अलग और तकनीकी दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री के सामने रखा। सूत्र बताते हैं कि परमार ने मुख्यमंत्री को समझाया कि:
"बड़ी संख्या में ऐसे तबादला प्रस्ताव हैं जिन्हें विभागीय स्तर पर मंत्रियों और अधिकारियों की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। लेकिन आखिरी दिन पोर्टल पर अत्यधिक दबाव और तकनीकी कारणों (सर्वर डाउन) के चलते इनके आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो सके। कई फाइलों पर तो पहले से ही 16 जून की तारीख दर्ज है, ऐसे में इन जायज मामलों को एक अवसर दिया जाना चाहिए।"
आधी रात तक चली 'तीव्र' ट्रांसफर एक्सप्रेस
मंत्री परमार की इस व्यावहारिक दलील को सुनने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपना रुख बदला और सीमित अवधि के लिए बड़ी राहत देने पर सहमति जता दी। सीएम ने समय-सीमा को 16 जून की रात 12 बजे तक बढ़ाने की विशेष मंजूरी दे दी।
1.सीएम की विशेष मंजूरी:कैबिनेट बैठक के दौरान.
मुख्यमंत्री द्वारा हरी झंडी मिलते ही सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) हरकत में आया और तुरंत संशोधित आदेश जारी किए गए।
2.फाइलों का त्वरित निपटारा:शाम से रात 12 बजे तक.
समय मिलते ही सभी विभागों के प्रशासनिक अमले ने लंबित और स्वीकृत फाइलों को तेजी से पोर्टल पर अपलोड करना शुरू किया।
3.हजारों आदेश जारी:रात 12 बजे.
नतीजा यह रहा कि अंतिम चंद घंटों में मध्य प्रदेश के अलग-अलग विभागों में हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादला आदेशों की झड़ी लग गई।
गलियारों में चर्चा: 'यू-टर्न' या 'व्यावहारिक फैसला'?
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस घटनाक्रम की चर्चा बहुत तेजी से हो रही है। कौतूहल इस बात को लेकर है कि एक ही बैठक में पहले तो समय-सीमा बढ़ाने से साफ इनकार किया गया और फिर कुछ ही देर बाद विशेष परिस्थितियों का हवाला देकर फैसला बदल दिया गया।
हालांकि, सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इसे एक व्यावहारिक और संवेदनशीलता से भरा निर्णय माना जा रहा है, जिससे तकनीकी बाधाओं के कारण अटकने वाले मामलों को न्याय मिल सका।