नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। कोलकाता और मुंबई से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक हलचल तेज है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद जिस राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को कमजोर आंका जा रहा था, वह आज विपक्ष में हुई बड़ी टूट के बाद प्रचंड मजबूती की ओर बढ़ चुका है।
विपक्षी खेमे में सेंधमारी और आंतरिक कलह के कारण लोकसभा में विपक्षी सांसदों की संख्या लगातार घटती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में हुई इस बड़ी बगावत ने संसद के भीतर सत्ता का पूरा समीकरण ही बदल कर रख दिया है।
विपक्ष को लगा तगड़ा झटका: सीधे 48 सांसद हुए कम
2024 के लोकसभा चुनाव में 'INDIA' गठबंधन एक मजबूत ताकत बनकर उभरा था, लेकिन महज दो साल के भीतर ही इसकी तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
TMC में बड़ी टूट: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 20 लोकसभा सांसद बागी हो चुके हैं। इसके बाद टीएमसी के पास अब केवल 8 सांसद ही बचे हैं। इन 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया है और NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है।
उद्धव गुट भी बिखरा: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के साथ जाने का मन बना चुके हैं, जिससे उद्धव खेमे में अब सिर्फ 3 सांसद रह गए हैं।
DMK और कांग्रेस की राहें जुदा: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके और कांग्रेस की पुरानी दोस्ती टूट गई है। राहुल गांधी को लेकर डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन के सुर पूरी तरह बदल चुके हैं और पार्टी ने 'INDIA' गठबंधन से अलग होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके चलते गठबंधन से सीधे 22 सांसद और कम हो गए हैं।
नया समीकरण: इन बड़े झटकों के बाद, चुनाव के वक्त मजबूत दिखने वाले 'INDIA' गठबंधन के पास अब कुल मिलाकर केवल 187 सांसद ही बचे हैं।
सदन में अब किस पार्टी के पास कितनी ताकत?
लोकसभा में विपक्ष और निर्दलीय/गैर-गठबंधन दलों की मौजूदा स्थिति कुछ इस प्रकार है:
1. 'INDIA' गठबंधन (कुल: 187 सांसद)
| पार्टी | सांसदों की संख्या | पार्टी | सांसदों की संख्या |
|---|---|---|---|
| कांग्रेस | 98 (असम के नौगांव से प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा) | सपा | 37 |
| TMC | 8 | शिवसेना (UBT) | 3 |
| NCP | 8 | RJD | 4 |
| CPI (M) | 4 | IUML | 3 |
| JMM | 3 | CPI | 2 |
| NC | 2 | VCK | 2 |
| अन्य सहयोगी | 11 (MDMK, KCM, RSP व अन्य) |
2. गैर-गठबंधन दल (जो INDIA और NDA दोनों के साथ नहीं हैं)
DMK: 22
YSRCP: 4
आप (AAP): 3
अन्य (AIMIM, BJD, ZPM, HLP, VOTPP): 5 (प्रत्येक का 1)
क्या NDA छू पाएगा दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा?
संविधान संशोधन और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। याद हो कि इसी साल अप्रैल में 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026' (परिसीमन विधेयक) दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण लोकसभा में गिर गया था, तब पक्ष में 298 वोट ही पड़े थे।
वर्तमान में लोकसभा की प्रभावी संख्या 540 है (शिलांग, नौगांव और बशीरहट की 3 सीटें खाली होने के कारण)। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।
NDA का नया गणित:
मौजूदा NDA: 293
TMC के बागी (NCPI): +20 (समर्थन घोषित)
शिवसेना (उद्धव गुट के बागी): +6
DMK का संभावित रुख: +22 (यदि कांग्रेस से टूटने के बाद साथ आते हैं)
अतिरिक्त निर्दलीय/अन्य: +5 (जो अप्रैल की वोटिंग में साथ थे)
संभावित कुल आंकड़ा: 346
इस नए समीकरण के बाद NDA दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े (360) से महज 14 वोट दूर रह जाएगा, जिसे हासिल करना सरकार के लिए अब ज्यादा मुश्किल नहीं दिख रहा।
राज्यसभा में भी NDA मजबूत
सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि उच्च सदन (राज्यसभा) में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत की दहलीज पर खड़ा है।
राज्यसभा की वर्तमान प्रभावी संख्या 242 है, जहां बहुमत के लिए 122 और दो-तिहाई के लिए 164 वोट चाहिए।
इस समय NDA के पास 148 सांसद हैं, जबकि विपक्षी 'INDIA' गठबंधन सिमटकर महज 64 पर रह गया है। वहीं 28 सांसद अन्य दलों के हैं।
निष्कर्ष: विपक्ष की इस ऐतिहासिक टूट और क्षेत्रीय दलों के बदलते रुख ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को दिल्ली की सत्ता में अभूतपूर्व रूप से शक्तिशाली बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एनडीए इस संख्या बल के सहारे आगामी सत्रों में बड़े और कड़े संवैधानिक सुधारों को अमलीजामा पहनाने में कामयाब होता है।