नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। हाल ही में 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर पूरे हुए चुनाव के ताजा नतीजों के बाद एनडीए का आंकड़ा 152 सीटों तक पहुंच गया है। इस बढ़त के साथ ही सत्ताधारी गठबंधन अब राज्यसभा में भी बेहद मजबूत स्थिति में आ गया है, हालांकि वह अभी भी दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से थोड़ा दूर है।
गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के शुरुआती चरण में जब 24 सीटों पर सांसद निर्विरोध चुने गए, तो उनमें से 19 सांसद अकेले एनडीए के थे। इसके बाद झारखंड में एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी की जीत ने गठबंधन के सांसदों की संख्या को 152 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
दो-तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर एनडीए
संविधान संशोधन और देश में आगामी 'परिसीमन' (Delimitation) से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ताजा समीकरणों के बाद एनडीए इस ऐतिहासिक आंकड़े से अब केवल 11 सीटें दूर है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि मोदी सरकार आगामी मॉनसून सत्र के दौरान परिसीमन से जुड़े बिल को दोबारा सदन के पटल पर रख सकती है, जिसके लिए राज्यसभा में यह संख्या बल बेहद निर्णायक साबित होगा।
पश्चिम बंगाल से बढ़ सकती है ताकत हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चार बागी सांसदों— सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक के इस्तीफे के बाद वहां सीटें खाली हुई हैं। राज्य विधानसभा में बीजेपी की मजबूत स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इन सभी सीटों पर बीजेपी आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो एनडीए का आंकड़ा और मजबूत हो जाएगा।
क्या है सदन का मौजूदा दलीय समीकरण?
ताजा फेरबदल के बाद राज्यसभा में मुख्य राजनीतिक ध्रुवीकरण इस प्रकार नजर आ रहा है:
एनडीए गठबंधन (सत्तारूढ़): 152 सांसद (इसमें सबसे बड़ा दल बीजेपी है)।
इंडिया गठबंधन (विपक्ष): 64 सांसद (द्रमुक (DMK) के 8 और आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 सांसदों के इस ग्रुप से अलग होने के बाद विपक्ष का आंकड़ा सिमट गया है)।
गैर-गठबंधन दल (तटस्थ): बीजू जनता दल (BJD) के 5 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के 7 सांसद वर्तमान में किसी भी गुट का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, ये दल कई नीतिगत मुद्दों पर सरकार का साथ देते रहे हैं। ओडिशा के राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद बीजद के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।
लोकसभा में भी बड़े उलटफेर के संकेत
उच्च सदन के साथ-साथ निचले सदन (लोकसभा) में भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों और राजनीतिक अटकलों के मुताबिक, टीएमसी के करीब 20 सांसद एक अलग गुट बनाकर एनडीए सरकार को समर्थन देने का मन बना रहे हैं। यदि यह गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो लोकसभा में भी एनडीए की संख्या आसानी से 300 के पार चली जाएगी, जिससे सरकार की स्थिरता और विधायी कामकाज को नई गति मिलेगी।