शिवसेना के 60 साल: विरासत की जंग के बीच दो गुटों का शक्ति प्रदर्शन, उद्धव की पार्टी पर फिर मंडराया 'टूट' का साया

नेस्को ग्राउंड बनाम सायन; असली शिवसेना के दावे के बीच उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर पार्टी को फिर हिलाया।

19 Jun 2026  |  100

 

मुंबई।

बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना आज अपनी स्थापना के ऐतिहासिक 60 वर्ष पूरे कर रही है। कभी महाराष्ट्र की राजनीति में एकछत्र राज करने वाली और बालासाहेब की कड़क आवाज से पहचानी जाने वाली शिवसेना आज दो फाड़ हो चुकी है। इस ऐतिहासिक स्थापना दिवस के मौके पर 'उद्धव ठाकरे गुट' और 'एकनाथ शिंदे गुट' मुंबई की सड़कों से लेकर बड़े मैदानों तक अपनी-अपनी ताकत का अहसास करा रहे हैं।

यह स्थापना दिवस ऐसे नाजुक समय पर आया है जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) एक बार फिर सांसदों के बड़े विद्रोह से जूझ रही है और पार्टी दूसरी बार टूटने की कगार पर खड़ी है।

मुंबई में दो जगह 'महा-शक्ति प्रदर्शन'

असली शिवसेना और बालासाहेब की विरासत पर अपना दावा ठोकने के लिए दोनों गुटों ने मुंबई में अलग-अलग बड़े आयोजन किए हैं:

एकनाथ शिंदे गुट (शिवसेना): गोरेगांव के नेस्को (NESCO) ग्राउंड में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। शिंदे गुट ने पूरे महाराष्ट्र से कार्यकर्ताओं को मुंबई बुलाया है और एक विशेष वीडियो जारी कर खुद को बालासाहेब के विचारों की असली शिवसेना बताया है। इनके पोस्टरों में बालासाहेब ठाकरे, आनंद दिघे और छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं।

उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT): सायन इलाके में पार्टी का 60वां स्थापना दिवस मना रहा है। जमीनी कार्यकर्ताओं के दम पर उद्धव गुट अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश में जुटा है।

उद्धव गुट को बड़ा झटका: 9 में से 6 सांसदों की बगावत!

इस स्थापना दिवस का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम यह है कि लोकसभा में उद्धव ठाकरे की पार्टी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। अब उद्धव ठाकरे के साथ केवल 3 लोकसभा सांसद ही बचे हैं। इस ताजा विद्रोह ने उद्धव खेमे की चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है।

"गद्दारों को वहीं तोड़ो..." मुंबई की सड़कों पर पोस्टर वॉर

सांसदों के इस ताजा विद्रोह के बाद मुंबई की सड़कों पर उद्धव गुट का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। जगह-जगह आक्रामक बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है:

"गद्दार बदले, चेहरे बदले, विचारधारा नहीं बदली। अगर कोई सांसद, विधायक या पार्षद पार्टी छोड़कर जाता है, तो उसे वहीं तोड़ो।"

इतिहास के पन्नों में शिवसेना की टूट की क्रोनोलॉजी

शिवसेना के 60 साल के इतिहास में यह कोई पहली टूट नहीं है। समय-समय पर पार्टी को बड़े झटके लगते रहे हैं। आइए डालते हैं एक नजर:

वर्षनेता का नामक्या हुआ?
1991छगन भुजबलशिवसेना से अलग हुए और पार्टी को पहला बड़ा झटका दिया।
1999गणेश नायकपार्टी छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हो गए।
2004नारायण राणेमतभेदों के बाद शिवसेना से विदा ली।
2007राज ठाकरेबालासाहेब से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई।
2022एकनाथ शिंदेसबसे बड़ी बगावत करते हुए अधिकांश विधायकों के साथ अलग हुए और भाजपा संग सरकार बनाई।
2026 (वर्तमान)-उद्धव गुट के 6 सांसदों की ताजा बगावत से पार्टी में फिर महासंकट।

 

निष्कर्ष: 60 साल पूरे होने का यह जश्न शिवसेना के दोनों धड़ों के लिए आत्ममंथन और अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। एक तरफ जहाँ शिंदे गुट सत्ता और बहुमत के दम पर खुद को असली साबित करने में जुटा है, वहीं उद्धव ठाकरे अपनों की बगावत के बीच पार्टी को बिखरने से बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

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