लक्जमबर्ग/नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर शांति, सौहार्द और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने वाले 'द आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर को एक और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। 'वर्ल्ड पीस फोरम' (WPF) ने मानवता, शांति और भाईचारे के क्षेत्र में पिछले 45 वर्षों से किए जा रहे उनके अद्वितीय प्रयासों के लिए उन्हें 'लक्जमबर्ग पीस प्राइज' (Luxembourg Peace Prize) से सम्मानित किया है।
गुरुदेव ने अब तक दुनिया के 182 देशों में लोगों को मानसिक शांति और सद्भाव से जीने की कला सिखाई है। इसके साथ ही उन्होंने कई वैश्विक संघर्षों और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मध्यस्थ (Mediation) की भूमिका निभाकर हिंसा से पीड़ित लोगों के मानसिक तनाव और सदमे को दूर करने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
"बंटवारे की जगह पर पुल का काम करें युवा"
प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण करते हुए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने संघर्षों की जड़ पर प्रहार किया। उन्होंने समाज और दुनिया के सामने शांति स्थापना का एक व्यावहारिक सूत्र रखा:
आंतरिक शांति ही समाधान: गुरुदेव ने कहा, "किसी भी बाहरी संघर्ष का मूल कारण व्यक्ति के भीतर आंतरिक शांति का अभाव है। संघर्ष वाले क्षेत्रों में हमारे अनुभवों ने सिखाया है कि समाजों को आज ऐसे लोगों की जरूरत है जो दूरियां मिटा सकें, बातचीत का दौर बहाल कर सकें और भरोसा फिर से कायम कर सकें।"
युवाओं को संदेश: उन्होंने दुनिया भर के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा, "आज समाज में मध्यस्थों की बहुत जरूरत है। मैं चाहता हूं कि हर युवा, जहां भी समुदायों में बंटवारा या दरार देखे, वहां दूरियां मिटाने के लिए एक 'पुल' (Bridge) का काम करे।"
तनाव-मुक्त मन और हिंसा-मुक्त समाज ही स्थायी शांति की नींव
गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि शांति का मतलब निष्क्रिय हो जाना नहीं है। उन्होंने कहा, "शांति का मतलब आत्म-संतुष्टि नहीं है और आक्रामकता कोई बहादुरी नहीं है। सच्ची शांति तब आती है जब इंसान जागरूक और सक्रिय दोनों हो।"
आधुनिक समाज की सबसे बड़ी चुनौती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा:
"तनाव इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। एक तनाव-मुक्त मन और हिंसा-मुक्त समाज ही इस धरती पर स्थायी शांति की नींव रख सकते हैं।"
उन्होंने वैश्विक बजट और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आज दुनिया भर में सुरक्षा पर तो बहुत संसाधन खर्च किए जाते हैं, लेकिन शांति को बढ़ावा देने वाले प्रयासों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है, जबकि दोनों को बराबर तवज्जो मिलनी चाहिए।
क्या है 'लक्जमबर्ग पीस प्राइज'?
यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 'वर्ल्ड पीस फोरम' द्वारा उन चुनिंदा व्यक्तियों, नेताओं और संगठनों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने दुनिया भर में शांति, आपसी मेल-मिलाप, सहिष्णुता और मानवीय गरिमा को आगे बढ़ाने में उत्कृष्ट और दूरगामी योगदान दिया हो। गुरुदेव को यह सम्मान मिलना वैश्विक स्तर पर भारत के शांति संदेश की एक और बड़ी जीत है।