बुर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड)। दुनिया को युद्ध की विभीषिका से बचाने और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में स्थिरता लाने के लिए एक ऐतिहासिक कूटनीतिक पहल की शुरुआत हो चुकी है। स्विट्जरलैंड के खूबसूरत बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर शुरू होने जा रहा है। पिछले हफ्ते हुए अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद हो रही यह बैठक बेहद अहम है, जिसमें दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समाधान खोजने का कड़ा समय दिया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल बातचीत में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। उन्होंने साफ किया है कि उनका मुख्य मकसद बातचीत के लिए एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करना है, जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इजराइल-लेबनान संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता निकल सके।
मेजबान, मध्यस्थ और डेलिगेशन: कौन-कौन है शामिल?
इस महामंथन में दोनों देशों के शीर्ष नीति-निर्माताओं के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान भी एक महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ रहा है:
अमेरिकी नेतृत्व: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कमान संभाल रहे हैं।
ईरानी डेलिगेशन: ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अरागची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती मोर्चा संभालेंगे।
मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान: शांति की इस कोशिश में पुल का काम करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं।
परमाणु ठिकाने बनाम 6 अरब डॉलर: क्या है सौदेबाजी?
वार्ता के पहले दौर में दोनों देशों की ओर से 'गिव एंड टेक' (लेन-देन) का एक बड़ा फॉर्मूला टेबल पर है:
अमेरिका की मांग: वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान तुरंत संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों का दौरा करने की अनुमति दे। गौरतलब है कि इन ठिकानों का आखिरी निरीक्षण जून 2025 में हुआ था।
ईरान को क्या मिलेगा?: यदि ईरान यूएन निरीक्षण के लिए तैयार होता है, तो इसके बदले अमेरिका कतर के बैंकों में जमी (Freeze) ईरान की 6 अरब डॉलर की रकम को जारी करने के लिए तैयार है। इस विशाल राशि का इस्तेमाल ईरान खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य मानवीय जरूरतों के लिए कर सकेगा।
रास्ते के रोड़े: इजराइल और होर्मुज स्ट्रेट का तनाव
इस ऐतिहासिक शांति वार्ता के शुरू होने के बावजूद पर्दे के पीछे बड़े भू-राजनीतिक खतरे मंडरा रहे हैं:
1. नेतन्याहू बन सकते हैं रुकावट
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहते हैं। खुफिया एजेंसियों को डर है कि नेतन्याहू का यह आक्रामक रुख चल रही शांति प्रक्रिया में रोड़ा अटका सकता है।
2. होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप की चेतावनी
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर भी सस्पेंस बरकरार है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि 60 दिनों की इस बातचीत के दौरान वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में आगाह भी किया कि यदि यह शांति समझौता विफल रहा, तो भविष्य में अमेरिका जहाजों पर भारी शुल्क लगा सकता है।