नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की तारीफ करना एक बार फिर कांग्रेस सांसद शशि थरूर को भारी पड़ गया है। जी-7 (G-7) सम्मेलन के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी के रुख का समर्थन करने पर थरूर अपनी ही पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के भीतर एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है, जिसने पार्टी और थरूर के बीच के पुराने मतभेदों को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
पवन खेड़ा का तीखा तंज: "थरूर की प्रशंसा अब इतनी बढ़ गई है कि..."
शशि थरूर के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
"ऐसा लगता है कि शशि थरूर की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति प्रशंसा अब इस कदर बढ़ गई है कि वह ऐसी बातें भी सुन लेते हैं जो मोदी जी ने कभी कही ही नहीं। थरूर साहब ने पीएम मोदी की ऐसी सख्त कूटनीति और बयान सुन लिए, जो किसी भी आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं। शायद हम जैसे बाकी लोग सामान्य इंसानों की तरह ही सुन और समझ पाते हैं।"
थरूर का करारा पलटवार: "तथ्यों को नहीं मरोड़ता, मीडिया रिपोर्टों पर कायम हूँ"
पवन खेड़ा के इस हमले पर शशि थरूर ने भी बेहद सधे और कड़े शब्दों में जवाब दिया। थरूर ने कहा कि वह जो कुछ भी पढ़ते हैं, उसे याद रखते हैं और उनके पूरे सार्वजनिक जीवन में आज तक किसी ने उन पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप नहीं लगाया है।
थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर जो बात कही थी, वह पूरी तरह मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित थी। उन्होंने कहा, "मैं अपने बयान पर आज भी पूरी तरह कायम हूँ।"
"नाविकों की सुरक्षा पर राजनीति करना हैरान करने वाला"
पवन खेड़ा की टिप्पणी से आहत थरूर ने इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:
गंभीरता का हवाला: हाल की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में तीन भारतीय नागरिकों (नाविकों) की मौत हुई है। मेरी चिंता सिर्फ देश के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर थी।
सिद्धांत की बात: युद्ध जैसी स्थितियों में भी व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नागरिक नाविकों को किसी भी सैन्य कार्रवाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
निशाना: थरूर ने कहा कि अगर कुछ लोग इस संवेदनशील मुद्दे पर चिंता जताने के बजाय राजनीति करने में ज्यादा रुचि रखते हैं, तो यह उनकी अपनी सोच को दिखाता है।
थरूर ने असल में क्या कहा था?
शशि थरूर ने दावा किया था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने सार्वजनिक और निजी, दोनों बैठकों में भारत का पक्ष बेहद स्पष्टता से रखा था कि नागरिक नाविक सैनिक नहीं होते, इसलिए उन्हें युद्ध के दौरान निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
भाजपा ने ली चुटकी: "थरूर ने राहुल गांधी को बेनकाब किया"
इस अंदरूनी कलह का फायदा उठाने में भाजपा ने भी देर नहीं की। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि शशि थरूर के बयान ने राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि जब राष्ट्रीय हितों और मजबूत विदेश नीति की बात आती है, तो कांग्रेस के अपने ही नेता पीएम मोदी की कूटनीति की सराहना करने को मजबूर हो जाते हैं।
'ऑपरेशन सिंदूर' से ही बढ़ी थीं दूरियां
गौरतलब है कि शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच दूरियां 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से ही काफी बढ़ गई थीं। केंद्र सरकार ने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष रखने के लिए जो प्रतिनिधिमंडल तैयार किया था, उसकी कमान थरूर को सौंपी गई थी। दिलचस्प बात यह थी कि कांग्रेस ने इस प्रतिनिधिमंडल के लिए थरूर का नाम नहीं सुझाया था, लेकिन इसके बावजूद थरूर ने सरकार के निमंत्रण को स्वीकार किया और विदेश जाकर भारत का पक्ष मजबूती से रखा था। तभी से पार्टी के भीतर उन्हें लेकर नाराजगी का माहौल है, जो अब G-7 विवाद के बाद और गहरा गया है।