नई दिल्ली।
पूरी दुनिया इस समय 'इंटरनेशनल योग डे 2026' के जश्न में डूबी हुई है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर आम और खास, हर कोई योगाभ्यास के जरिए सेहत का संदेश देता नजर आ रहा है। लेकिन आज के दौर में योग सिर्फ एक शारीरिक क्रिया या प्राचीन साधना पद्धति मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया भर में एक बेहद मुनाफे वाली और तेजी से बढ़ती बड़ी इंडस्ट्री के रूप में तब्दील हो चुका है।
'ग्रैंड व्यू रिसर्च' के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में भारत के योग मार्केट की वैल्यू 6.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर (57,000 करोड़ रुपए से ज्यादा) आंकी गई थी। वहीं, अब अनुमान लगाया गया है कि अगले एक दशक से भी कम समय में भारतीय योग इंडस्ट्री की सूरत पूरी तरह बदलने वाली है। साल 2033 तक यह 10 फीसदी से ज्यादा की वार्षिक चक्रवृधि दर (CAGR) से बढ़कर करीब 18 बिलियन डॉलर (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये) की हो जाएगी, यानी इसमें सीधे 150% से ज्यादा की भारी ग्रोथ देखने को मिलेगी।
भारतीय योग बाजार के 5 मुख्य पिलर्स
इस बढ़ते हुए सेक्टर में पारंपरिक क्लास और डिजिटल फिटनेस ऐप से लेकर ग्लोबल वेलनेस टूरिज्म तक सब कुछ शामिल है:
ऑफलाइन योग और स्टूडियो (दबदबा बरकरार): देश में आज भी पारंपरिक ऑफलाइन कोर्स और कम्युनिटी-बेस्ड स्टूडियो का वर्चस्व है, जो अकेले 82% से ज़्यादा मार्केट शेयर के साथ सबसे बड़ा रेवेन्यू कमाते हैं।
डिजिटल और ऑनलाइन योग (फास्टेस्ट ग्रोइंग): Cult.fit, Fittr और HealthifyMe जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म्स की बदौलत ऑनलाइन योग और वेलनेस ऐप्स शहरी युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
योग के कपड़े (Yoga Apparel): भारतीय योग कपड़ों (बॉटम वियर और आउटर वियर) के मार्केट ने 2 बिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व कमाया है, जिसके 2033 तक 5 बिलियन डॉलर के पार जाने की उम्मीद है।
योग टूरिज्म और रिट्रीट (कमाई का जरिया): ऋषिकेश, केरल और बिहार जैसे वैश्विक योग हब में घरेलू और विदेशी वेलनेस सैलानियों की आमद से स्थानीय स्तर पर हर साल अरबों रुपये का बिजनेस हो रहा है।
योग एक्सेसरीज: मैट, ब्लॉक और स्ट्रैप जैसे योग उपकरणों की मार्केट वैल्यू 720 मिलियन डॉलर आंकी गई है, जिसमें शहरीकरण के कारण लगातार इजाफा हो रहा है।
क्यों आ रही है योग मार्केट में इतनी बड़ी तेजी?
विशेषज्ञों के अनुसार, योग के कमर्शियलाइजेशन और इसके ब्रांड बनने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:
सरकारी प्रोत्साहन: आयुष मंत्रालय और संस्थागत कार्यक्रम लगातार योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य के एक मुख्य स्तंभ के तौर पर प्रमोट कर रहे हैं।
बचाव-केंद्रित स्वास्थ्य (Preventive Healthcare): कोरोना महामारी के बाद लोग बीमार होने से पहले ही खुद को फिट रखने पर खर्च कर रहे हैं।
शहरी आय में वृद्धि: दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में लोगों की खर्च करने योग्य आय (Disposable Income) बढ़ी है, जिससे वे प्रीमियम वेलनेस ब्रांड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट: 126 बिलियन डॉलर के पार पहुंचा योग का डंका
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी योग का डंका बज रहा है। वर्तमान में ग्लोबल योग मार्केट की वैल्यू लगभग 138.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसके 2033 तक 269.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
महिलाएं हैं योग की सबसे बड़ी कंज्यूमर
वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग करने वालों में 72 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की है, जो इस इंडस्ट्री का सबसे बड़ा कंज्यूमर बेस हैं। उम्र के लिहाज से 30 से 50 साल का आयु वर्ग योग पर सबसे ज्यादा खर्च कर रहा है। इसके अलावा, वैश्विक योग टूरिज्म (ट्रैवल और रिट्रीट) का बाजार अलग से 174 बिलियन डॉलर से 245 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच चुका है, जिसका मुख्य केंद्र भारत समेत पूरा एशिया-पैसिफिक क्षेत्र बना हुआ है।