कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे आंतरिक घमासान और नेताओं के बीच की कड़वाहट अब खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया पर आ गई है। पार्टी और बागी नेताओं के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सीनियर टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा के एक तीखे बयान पर जोरदार पलटवार किया है। काकोली घोष ने महुआ मोइत्रा पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता अब टीएमसी की राजनीति और उसकी मनगढ़ंत बयानबाजी को पूरी तरह से खारिज कर चुकी है।
यह ताजा विवाद महुआ मोइत्रा के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल उठाए थे और दावा किया था कि उनका सियासी करियर लगभग खत्म हो चुका है।
सोशल मीडिया पर सीधा हमला: "महुआ की बातें हकीकत से दूर"
महुआ मोइत्रा के दावों का जवाब देने के लिए काकोली घोष दस्तीदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) का सहारा लिया। उन्होंने महुआ पर निशाना साधते हुए लिखा:
"महुआ मोइत्रा की बातें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और उनका जमीनी हकीकत से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। यह सिर्फ उनकी अपनी काल्पनिक सोच है। बंगाल की जागरूक जनता ने अब साफ जनादेश दे दिया है और वह आपकी इस अराजक राजनीति को पूरी तरह नकार चुकी है। अब राज्य में कोई भी न तो आपको स्वीकार कर रहा है और न ही आपकी बातों को गंभीरता से ले रहा है।"
महुआ मोइत्रा ने आखिर क्या कहा था?
दरअसल, टीएमसी की तेजतर्रार नेता महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए एक बड़ा राजनीतिक आकलन पेश किया था। महुआ ने कहा था:
बीजेपी पर आरोप: भारतीय जनता पार्टी (BJP) इन बागी सांसदों को सिर्फ अपने अल्पकालिक राजनीतिक मकसद पूरे करने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
डीलिमिटेशन का डर: जैसे ही संसद में डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल पास हो जाएगा, वैसे ही बीजेपी के लिए इन सांसदों की जरूरत खत्म हो जाएगी।
भविष्य पर संकट: महुआ का दावा था कि बगावत करने वाले ये नेता त्रिशंकु जैसी स्थिति में आ जाएंगे— न तो ये भविष्य में कभी टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीत पाएंगे और न ही बीजेपी इन्हें पूरी तरह अपनाएगी, जिससे इनका राजनीतिक भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
थमता नजर नहीं आ रहा टीएमसी का अंदरूनी संकट
काकोली घोष दस्तीदार के इस कड़े रुख और तीखे पलटवार ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच यह जुबानी जंग सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनावों और पार्टी के भीतर सांगठनिक नेतृत्व को लेकर चल रही एक बड़ी वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा है। फिलहाल इस बयानबाजी के बाद बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।