एमपी के किसानों को मोहन सरकार की बड़ी सौगात: अब 31 मार्च की बाध्यता खत्म, पूरे 1 साल बाद चुका सकेंगे KCC का 'जीरो परसेंट' लोन

कैबिनेट बैठक में लिए गए कई ऐतिहासिक फैसले; मुख्यमंत्री कन्यादान योजना 5 साल के लिए बढ़ी, 214 नए सरकारी स्कूल खोलने की मंजूरी और मंदिरों में लागू होगी डिजिटल दान व्यवस्था।

23 Jun 2026  |  154

 

 

भोपाल: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं (किसानों) को एक बहुत बड़ी राहत देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण चुकाने के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में निर्णय लिया गया है कि अब किसानों को हर साल 31 मार्च तक सहकारी बैंकों का लोन चुकाने की मजबूरी नहीं होगी।

अब किसान सहकारी बैंकों से जिस तारीख को लोन लेंगे, उन्हें उसके ठीक एक साल बाद तक बिना किसी ब्याज (0% Interest) के कर्ज चुकाने की छूट मिलेगी। सरकार के इस कदम से सूबे के लाखों किसानों को फसल बेचने और नकदी का प्रबंधन करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।

लोन व्यवस्था में बदलाव: तारीख का नया गणित

कैबिनेट के फैसलों की आधिकारिक जानकारी देते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि इस फैसले से राज्य सरकार के खजाने पर 880 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

पुरानी व्यवस्था: सरकार सहकारी बैंकों के माध्यम से 0% ब्याज पर करीब 25,000 करोड़ रुपये का लोन बांटती है। यह कर्ज रबी और खरीफ की फसलों के लिए अलग-अलग दिया जाता था, जिसे हर हाल में 31 मार्च तक चुकाना अनिवार्य था।

नई व्यवस्था: अब किसानों को तारीख की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी किसान ने 1 जून को बैंक से लोन लिया है, तो वह अगले वर्ष 1 जून तक इसे बिना ब्याज के चुका सकेगा। निर्धारित एक वर्ष की अवधि बीतने के बाद ही ब्याज देय होगा।

₹5,365 करोड़ की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को हरी झंडी

कैबिनेट बैठक में केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार और शिक्षा से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं को आगामी वर्षों के लिए निरंतरता (एक्सटेंशन) देने की मंजूरी दी गई है:

1. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना अगले 5 साल तक जारी

गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित इस लोकप्रिय योजना को अगले 5 साल तक लगातार जारी रखने की स्वीकृति दी गई है। इसके लिए 1,740 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। योजना के तहत प्रति विवाह 55,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है।

2. शिक्षा क्षेत्र का कायाकल्प: 214 नए हायर सेकेंडरी स्कूल

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए सर्वे और मैपिंग के आधार पर शत-प्रतिशत एडमिशन सुनिश्चित करने के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं:

अगले तीन वर्षों में प्रदेश में 214 नए हायर सेकेंडरी स्कूल खोले जाएंगे।

इसके साथ ही, 315 स्कूलों को हाई स्कूल में अपग्रेड किया जाएगा।

इस पूरी शैक्षणिक कार्ययोजना के लिए 635 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, शुजालपुर में एक स्वतंत्र लॉ (विधि) कॉलेज संचालित करने और राज्य के सभी विधि कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की मंजूरी दी गई है।

कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय (एक नजर में)

क्षेत्र / विभागलिया गया मुख्य निर्णय
खाद्यान्न आपूर्ति विभागखाद्यान्न परिवहन व्यय (Transportation Cost) के लिए 3,580 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्वमध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में अब दान व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल किया जाएगा, श्रद्धालु अब QR कोड के जरिए सीधे दान कर सकेंगे।
नीतिगत विमर्शराज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) और अंतर-जातीय विवाह (Inter-Caste Marriage) के परिप्रेक्ष्य में आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण और विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाने पर भी चर्चा।

 

संपादकीय दृष्टिकोण: मोहन यादव कैबिनेट का यह फैसला सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला है। KCC लोन चुकाने की समय-सीमा को एक वर्ष करना किसानों को बिचौलियों और साहूकारों के चंगुल से बचाएगा, क्योंकि अब वे अपनी फसल को सही दामों पर बेचने के बाद ही सहूलियत से कर्ज चुका सकेंगे। इसके साथ ही शिक्षा और डिजिटल डोनेशन जैसे कदम राज्य को आधुनिकता की ओर ले जाते हैं।

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