नई दिल्ली: छुट्टियों का सीजन शुरू होते ही हर कोई घूमने-फिरने की प्लानिंग में जुट जाता है। लेकिन आपकी इसी खुशी का फायदा उठाने के लिए साइबर ठग भी जाल बिछाकर तैयार बैठे हैं। इन दिनों वॉट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘80% Off’, ‘Dubai Tour Only ₹9,999’ और ‘Europe Trip at Throwaway Price’ जैसे बेहद आकर्षक और अविश्वसनीय ऑफर्स की बाढ़ आ गई है।
भारी डिस्काउंट के लालच में आकर लोग बिना सोचे-समझे तुरंत भुगतान कर देते हैं, और बाद में पता चलता है कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। आइए जानते हैं कि ये ठग किस तरह जाल बुनते हैं और आप इनसे खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
कैसे काम करती हैं फर्जी ट्रैवल वेबसाइट्स?
आजकल के ठग बेहद प्रोफेशनल तरीके से काम करते हैं। वे MakeMyTrip, Goibibo, Yatra या Booking.com जैसी नामी-गिरामी कंपनियों की हूबहू दिखने वाली फर्जी क्लोन वेबसाइट्स बना लेते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर विज्ञापन चलाकर ग्राहकों को भारी डिस्काउंट का लालच देते हैं और "सीमित समय का ऑफर" बताकर जल्द से जल्द पेमेंट करने का दबाव बनाते हैं। जैसे ही आप पैसे ट्रांसफर करते हैं, उनका फोन और वेबसाइट दोनों बंद हो जाते हैं।
फर्जी वेबसाइट को पहचानने के 5 अचूक तरीके
अविश्वसनीय डिस्काउंट: अगर कोई वेबसाइट आपको 70 से 80% या उससे ज्यादा की छूट दे रही है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। कोई भी असली कंपनी इतने घाटे में पैकेज नहीं बेचती।
वेबसाइट का पता (URL) गौर से देखें: ठग असली वेबसाइट के नाम में थोड़ा सा फेरबदल कर देते हैं।
असली: makemytrip.com
फर्जी: makemytrip-sale.in या makemytrip-discount.net
HTTPS और लॉक आइकन का भ्रम: हालांकि सुरक्षित वेबसाइट के आगे https:// और ताले (🔒) का निशान होता है, लेकिन याद रखें कि आजकल जालसाज भी अपनी फर्जी साइट्स पर यह सर्टिफिकेट लगा लेते हैं। इसलिए केवल इस पर भरोसा न करें।
फर्जी कस्टमर रिव्यूज: अगर किसी बिल्कुल नई या अनजान वेबसाइट पर अचानक से सैकड़ों 5-स्टार रेटिंग और तारीफों से भरे रिव्यूज दिख रहे हैं, तो वह संदिग्ध है।
अधूरी कॉन्टैक्ट डिटेल्स: फर्जी वेबसाइट्स पर अक्सर कोई वैध फोन नंबर, ऑफिस का पता या आधिकारिक कस्टमर केयर ईमेल आईडी मौजूद नहीं होती है।
सुरक्षित बुकिंग के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
ऑफिशियल ऐप का ही करें इस्तेमाल: हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से आधिकारिक ऐप डाउनलोड करके या सीधे मुख्य वेबसाइट पर जाकर ही बुकिंग करें।
अनजान लिंक्स से तौबा: वॉट्सऐप या एसएमएस पर आए किसी भी अनजान टूर पैकेज के लिंक पर क्लिक न करें।
पेमेंट गेटवे की जांच: सीधे किसी के व्यक्तिगत UPI आईडी या सीधे बैंक ट्रांसफर के बजाय हमेशा कंपनी के आधिकारिक और सुरक्षित पेमेंट गेटवे के जरिए ही भुगतान करें।
टोकन अमाउंट का नियम: यदि किसी नई ट्रैवल एजेंसी पर थोड़ा भी शक हो, तो पूरा पैसा एक साथ देने के बजाय शुरुआत में बहुत छोटा या न्यूनतम अमाउंट ही ट्रांसफर करें।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): अपने सभी बैंकिंग ऐप्स और ईमेल पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हमेशा ऑन रखें ताकि कोई आपकी मर्जी के बिना ट्रांजैक्शन न कर सके।
अगर ठगी हो जाए, तो घबराएं नहीं... तुरंत करें ये काम
यदि आप किसी वजह से इस फ्रॉड का शिकार हो ही गए हैं, तो बिना समय गंवाए ये कदम उठाएं:
बैंक को सूचित करें: तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर को कॉल करें और फ्रॉड की जानकारी देकर उस ट्रांजैक्शन को रुकवाने (Freeze) या रिवर्स करने की अपील करें।
साइबर हेल्पलाइन: फौरन राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
ऑनलाइन शिकायत: भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत और फ्रॉड के स्क्रीनशॉट्स दर्ज करें।
सलाह: छुट्टियों में खूबसूरत वादियों की सैर का सपना देखना बेहद अच्छी बात है, लेकिन 80% डिस्काउंट के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाना समझदारी नहीं है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अपनी छुट्टियों का आनंद लें!