भिंड (लहार)।
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार क्षेत्र में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के गेहूं उपार्जन में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। यहाँ सरकारी तंत्र और नियमों की आंखों में धूल झोंककर चार जालसाजों ने दूसरों की जमीनों पर फर्जी तरीके से किसान पंजीयन कराया और करीब 1.83 करोड़ रुपये का गेहूं समर्थन मूल्य पर बेच दिया। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुदगल की लिखित शिकायत पर लहार थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
जांच में खुली परतें: 23 किसानों के नाम पर बड़ा खेल
कलेक्टर (खाद्य) कार्यालय से प्राप्त संदिग्ध सूचियों के आधार पर जब जिला प्रशासन ने किसान पंजीयनों की गहन स्क्रूटनी कराई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुरुआती जांच में पता चला कि कुल 23 भोले-भाले किसानों के नाम और उनकी जमीनों का इस्तेमाल कर 6,970 क्विंटल गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेच दिया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए आरोपियों के खातों में 1 करोड़ 83 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान भी ट्रांसफर करा लिया गया।
ज़मीन मालिकों को पता तक नहीं, बिना अनुमति बना डाले दस्तावेज़
मामला संदिग्ध लगते ही राजस्व अधिकारियों और पटवारियों की टीम ने मौके पर जाकर जमीनों का भौतिक सत्यापन किया और पंचनामा तैयार किया। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि जिन सर्वे नंबरों और खसरों के आधार पर सरकारी पोर्टल पर पंजीयन कराए गए थे, राजस्व रिकॉर्ड में उन जमीनों पर आरोपियों का कोई मालिकाना हक ही नहीं था।
हैरानी की बात यह है कि असली भू-स्वामियों को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनकी जमीन पर कोई और सरकार को गेहूं बेच रहा है। आरोपियों ने न तो जमीन मालिकों से कोई लिखित अनुमति ली थी और न ही बटाई (अनुबंध) से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किया था।
अलग-अलग सोसायटियों से फैलाया जालसाजी का नेटवर्क
पुलिस और प्रशासनिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने सांठगांठ कर अलग-अलग विपणन समितियों (सोसायटियों) के जरिए इस ठगी को अंजाम दिया:
जैतपुरा (गुढ़ा) समिति: लिधौरा निवासी संचिता (पत्नी संजीव पाठक) ने विभिन्न गांवों के 18 खसरों को आपस में जोड़कर फर्जी पंजीयन कराया।
निवसाई समिति: लालपुरा निवासी गिरजा (पत्नी संतोष) और प्रतीक्षा (पत्नी गोविंद) ने इस समिति के माध्यम से फर्जी एंट्री कराकर गेहूं बेचा।
दबोह समिति: दबोह निवासी वीरसिंह तोमर ने दबोह, टोला और बरेई गांवों के पांच सर्वे नंबरों का अनधिकृत इस्तेमाल कर इस घोटाले में अपनी हिस्सेदारी निभाई।
गहराई से होगी जांच, कई अधिकारियों पर भी लटकी तलवार
जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा बिना किसी स्थानीय स्तर की मिलीभगत के मुमकिन नहीं है। कंप्यूटर ऑपरेटरों से लेकर समितियों के प्रबंधकों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया जाएगा, जिससे इस सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।