अंत्योदय अन्न योजना में बड़े बदलाव की तैयारी: अब परिवार नहीं, प्रति व्यक्ति 7 किलो के हिसाब से मिलेगा राशन

खाद्य सुरक्षा अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव; 35 किलो की अधिकतम सीमा के साथ तय होगा कोटा, सरकार ने 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026' पर 13 जुलाई तक मांगी जनता से राय।

25 Jun 2026  |  176

 

 

नई दिल्ली।

केंद्र सरकार देश के सबसे गरीब और कमजोर तबके को दी जाने वाली 'अंत्योदय अन्न योजना' (AAY) के तहत राशन वितरण की व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, अब राशन का आवंटन 'प्रति परिवार' के बजाय 'प्रति व्यक्ति' के आधार पर किया जाएगा। इस कदम का सीधा मकसद बड़े गरीब परिवारों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाना और राशन वितरण में लंबे समय से चली आ रही असमानता को दूर करना है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इसके लिए 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013' में संशोधन का खाका तैयार किया है और 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026' पर आगामी 13 जुलाई तक आम जनता से सुझाव व राय मांगी है।

क्या है मौजूदा व्यवस्था और क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?

वर्तमान नियमों के तहत, अंत्योदय (AAY) श्रेणी में आने वाले परिवारों को 'प्रति परिवार' हर महीने निश्चित रूप से 35 किलो अनाज दिया जाता है, चाहे उस परिवार में 2 सदस्य हों या 7 सदस्य।

इसके उलट, इससे थोड़ी बेहतर स्थिति वाले 'प्राथमिकता वाले परिवारों' (PHH) को प्रति व्यक्ति 5 किलो के हिसाब से राशन मिलता है। इस व्यवस्था के कारण एक बड़ी विसंगति पैदा हो रही थी। उदाहरण के लिए, एक बड़े अंत्योदय परिवार में प्रति व्यक्ति के हिस्से में आने वाला अनाज, प्राथमिकता वाले परिवार के सदस्यों की तुलना में काफी कम हो जाता था, जबकि अंत्योदय परिवार देश के सबसे कमजोर वर्ग से आते हैं।

कैसे काम करेगा नया नियम? (समझें राशन का पूरा गणित)

प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत अब प्रति व्यक्ति हर महीने 7 किलो अनाज आवंटित किया जाएगा, हालांकि इसमें प्रति परिवार अधिकतम 35 किलो की सीमा (कैपिंग) बरकरार रहेगी। इसे इस तरह समझा जा सकता है:

छोटे परिवार (2 सदस्य): नए नियम के हिसाब से दो सदस्यों वाले अंत्योदय परिवार को अब हर महीने 14 किलो अनाज मिलेगा।

बड़े परिवार (5 या अधिक सदस्य): पांच या उससे ज्यादा सदस्यों वाले परिवारों को 7 किलो प्रति व्यक्ति के हिसाब से अधिकतम तय सीमा यानी पूरे 35 किलो अनाज का लाभ मिलता रहेगा।

मंत्रालय का मानना है कि इस बदलाव से छोटे परिवारों के कुल कोटे पर तो कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़े और जरूरतमंद परिवारों के भीतर खाद्यान्न की उपलब्धता और पोषण की स्थिति में बड़ा सुधार होगा।

'मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण' पर केंद्रित है नया कानून

सरकार ने इस संशोधन को 'मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण' (Human Life Cycle Approach) के जरिए देश में खाद्य और पोषण सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की अपनी व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया है। इसका मूल उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लक्ष्यों के अनुरूप, हर गरीब तक किफायती कीमतों पर अच्छी गुणवत्ता वाला और पर्याप्त मात्रा में भोजन पहुंचाना है।

गौरतलब है कि वर्तमान में देश में 'प्राथमिकता वाले परिवारों' और 'अंत्योदय अन्न योजना', दोनों ही श्रेणियों के लाभार्थियों को चावल और गेहूं पूरी तरह से मुफ्त (Free) दिए जा रहे हैं।

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