विशेष आर्थिक ब्यूरो | नई दिल्ली
नई दिल्ली: मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में जुटे भारत के लिए लैटिन अमेरिका से एक बेहद चिंताजनक खबर आई है। वेनेजुएला में आए एक विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते कच्चे तेल के व्यापार के सामने नई और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस प्राकृतिक आपदा के कारण वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती, परिवहन नेटवर्क का ठप होना और प्रमुख बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं, जिससे भारत आने वाले कच्चे तेल की माल ढुलाई कई दिनों या हफ्तों के लिए धीमी होने की आशंका पैदा हो गई है।
होर्मुज की राहत पर फिरा पानी, नई प्राकृतिक आपदा तैयार
यह संकटपूर्ण स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब भारत पहले से ही मिडिल ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा था। हालांकि, कुछ ही दिनों पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने से यह उम्मीद जगी थी कि वैश्विक तेल आपूर्ति के इस लाइफलाइन मार्ग में जारी रुकावटें आखिरकार समाप्त हो जाएंगी। लेकिन भारत इस भू-राजनीतिक राहत का फायदा उठा पाता, उससे ठीक पहले वेनेजुएला की इस प्राकृतिक आपदा ने नई वैश्विक चुनौती पेश कर दी है।
भारतीय रिफाइनरियों का नया 'ऊर्जा गढ़' संकट में
हाल के महीनों में भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अपनी रणनीति बदलते हुए मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने के लिए वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में अप्रत्याशित वृद्धि की थी। विशेष रूप से अप्रैल और मई के महीनों में लैटिन अमेरिकी देश से रिकॉर्ड आयात किया गया, जिससे वेनेजुएला बहुत कम समय में भारत के सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं की सूची में शीर्ष पर आ गया। लेकिन अब इस अप्रत्याशित झटके से भारतीय रिफाइनरियों का पूरा गणित गड़बड़ाने की कगार पर है।
"भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला बहुत ही कम समय में कच्चे तेल के एक प्रमुख और बेहद महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा था। हालांकि भूकंप के केंद्र से दूर होने के कारण मुख्य निर्यात टर्मिनल फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे जैसे बिजली गुल होने, सड़कों और आंतरिक परिवहन नेटवर्क के क्षतिग्रस्त होने तथा बंदरगाहों पर सुरक्षात्मक आपात प्रतिबंधों के कारण जहाजों की सुचारू आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होगी।"
— कुणाल खन्ना, मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज, ईडीएमई (EDME) इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड
ला गुआइरा 'आपदा क्षेत्र' घोषित, जहाजों को लंबा इंतजार
भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वेनेजुएला के सबसे प्रमुख कार्गो बंदरगाहों में से एक, 'ला गुआइरा' (La Guaira) को आधिकारिक तौर पर आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और पोर्ट ऑपरेशंस पूरी तरह अनिश्चित काल के लिए प्रभावित हो गए हैं। इस आपदा का असर केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?
उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि इस आपदा का सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर तुरंत नहीं पड़ेगा। हालांकि, जहाजों को माल लोड करने के लिए बंदरगाहों पर लंबा इंतजार करना होगा। इसके अलावा:
रूट बदलने से डेमरेज शुल्क (Demurrage Charges) में भारी बढ़ोतरी होगी।
शिपिंग में देरी के कारण जहाजों का भाड़ा (Freight Rates) बढ़ेगा।
जोखिम बढ़ने से समुद्री बीमा लागत में इजाफा होगा, जिसका सीधा बोझ रिफाइनरियों और कारोबारियों पर पड़ेगा।
बीमा कंपनियों के सामने नया जोखिम
कुणाल खन्ना के अनुसार, अब तक वेनेजुएला के समुद्री मार्ग के लिए बीमा पॉलिसियां मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनावों और अमेरिकी प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती थीं। मगर अब, बीमा कंपनियों को प्राकृतिक आपदाओं के नए जोखिमों को भी इस रूट के आकलन में अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा, जिससे इस मार्ग का वाणिज्यिक गणित पूरी तरह बदल जाएगा।
भारत के अरबों डॉलर का निवेश दांव पर
भारत के न केवल व्यापारिक बल्कि गहरे परिचालन हित भी यहां प्रभावित हो रहे हैं। भारत की सरकारी तेल दिग्गज कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) ने वेनेजुएला की प्रमुख तेल परियोजनाओं में बड़ा निवेश किया हुआ है। यदि वहां तेल उत्पादन या निर्यात लंबे समय तक ठप रहता है, तो भारत के आर्थिक हितों को तगड़ा झटका लग सकता है।
बदल सकती है द्विपक्षीय रणनीतिक योजना
यह संकट ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की थी। इस बैठक में भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के खनन, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अरबों डॉलर के नए निवेश के अवसरों पर रोडमैप तैयार किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विनाशकारी भूकंप के बाद अब वेनेजुएला की प्राथमिकताएं बदलेंगी, जिससे दोनों देशों के बीच इन महत्वाकांक्षी व्यापारिक योजनाओं और निवेश की समय-सीमा में बड़े बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो भारतीय रिफाइनरियों को एक बार फिर नए वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों की तलाश के लिए मजबूर होना पड़ेगा।