वन हाउस, वन गैस कनेक्शन: अब एक घर में नहीं चलेंगे LPG और PNG दोनों, सरकार ने तय की 30 और 90 दिनों की सख्त डेडलाइन

डुप्लीकेट कनेक्शन और सब्सिडी की चोरी रोकने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय का बड़ा फैसला; पीएनजी आते ही सरेंडर करना होगा रसोई गैस सिलेंडर, जानें किन इलाकों पर नहीं पड़ेगा कोई असर।

29 Jun 2026  |  161

 

 

 

नई दिल्ली। अगर आप अपने घर में खाना पकाने के लिए रसोई गैस (LPG) सिलेंडर और पाइप वाली गैस (PNG) दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने ‘वन हाउस, वन गैस कनेक्शन’ (एक घर, एक गैस कनेक्शन) नीति को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब एक ही पते पर एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ चालू नहीं रखे जा सकेंगे।

इस पूरी कवायद का सीधा उद्देश्य डुप्लीकेट गैस कनेक्शनों को पूरी तरह खत्म करना है, जिससे सरकारी सब्सिडी की लीकेज को रोका जा सके और इसका लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। इसके लिए सरकार ने 30 और 90 दिनों की दो अलग-अलग समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है।

1. नया पीएनजी कनेक्शन लेने वालों के लिए '30 दिन' का नियम

पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों द्वारा तैयार किए गए नए खाके के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता अपने घर में नया पीएनजी कनेक्शन लगवाता है, तो उसे अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा।

उदाहरण के लिए: अगर किसी उपभोक्ता के घर में 1 जून को पीएनजी गैस की सप्लाई शुरू होती है, तो उसे हर हाल में 30 जून तक अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर संबंधित गैस एजेंसी में जाकर वापस जमा करना होगा।

2. पीएनजी वाले इलाकों में रहने वालों को '90 दिन' का अल्टीमेटम

उन शहरी क्षेत्रों या सोसायटियों के लिए नियम अलग हैं, जहां पीएनजी की पाइपलाइन पहले से बिछी हुई है और गैस की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है, लेकिन उपभोक्ताओं ने अब तक पीएनजी कनेक्शन नहीं लिया है।

ऐसे एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए 90 दिनों का अल्टीमेटम दिया जा रहा है।

गैस एजेंसियों ने इस संबंध में ग्राहकों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है।

यदि कोई उपभोक्ता इस 90 दिनों की नोटिस अवधि के बाद भी पीएनजी नेटवर्क पर शिफ्ट नहीं होता है, तो उसका मौजूदा एलपीजी कनेक्शन अस्थायी रूप से सस्पेंड या पूरी तरह से रद्द किया जा सकता है।

ग्रामीण और बिना पाइपलाइन वाले क्षेत्रों को बड़ी राहत

इस नए नियम को लेकर किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि रसोई गैस सिलेंडर बाजार से पूरी तरह गायब नहीं होने वाले हैं।

कोई बदलाव नहीं: जो उपभोक्ता ग्रामीण इलाकों में रहते हैं या जिन शहरी कॉलोनियों में अभी तक पीएनजी का बुनियादी ढांचा (पाइपलाइन) नहीं पहुंचा है, वहां पहले की तरह ही एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी जारी रहेगी।

इन उपभोक्ताओं पर 30 या 90 दिनों की इस डेडलाइन का कोई असर नहीं पड़ेगा।

स्वच्छ ईंधन और सुगम व्यवस्था पर जोर सरकार की मंशा महानगरों और बड़े शहरों में पीएनजी जैसे स्वच्छ और सुरक्षित ईंधन (क्लीन फ्यूल) के उपयोग को तेजी से बढ़ावा देना है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को बार-बार सिलेंडर बुक करने और उसकी भारी-भरकम ढुलाई से निजात मिलेगी, बल्कि देश के शहरी क्षेत्रों में गैस वितरण की एक आधुनिक और सुदृढ़ व्यवस्था खड़ी हो सकेगी।

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