'AI' की भूख से दुनिया में बढ़ा मेमोरी चिप का महा-संकट! स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स होंगे महंगे

टेक कंपनियों के अरबों डॉलर के निवेश से बदला बाजार; HBM की डिमांड ने रोकी आम चिप्स की रफ्तार, ऐपल ने बढ़ाए दाम।

30 Jun 2026  |  174

 

 

नई दिल्ली/सिलिकॉन वैली।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती दुनिया अब सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों के सर्वर रूम तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका सीधा असर अब आम ग्राहकों की जेब पर पड़ने जा रहा है। एआई की भारी डिमांड के कारण वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत (सप्लाई चेन क्राइसिस) शुरू हो गई है।

हाल ही में दिग्गज टेक कंपनी ऐपल (Apple) ने मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए अपने कुछ मैकबुक और आईपैड मॉडल्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है; आने वाले दिनों में स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, क्लाउड सर्विसेज़ और यहाँ तक कि आधुनिक कारें भी काफी महंगी हो सकती हैं।

क्या है इस संकट की मुख्य वजह?

दरअसल, OpenAI, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेज़न और Nvidia जैसी दिग्गज टेक कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स को अपग्रेड करने पर अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रही हैं। एआई मॉडल्स और सुपरकंप्यूटर्स को चलाने के लिए एक बेहद एडवांस चिप हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की जरूरत होती है।

उत्पादन का असंतुलन: सैमसंग (Samsung), SK Hynix और माइक्रोन (Micron) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनियां अब अपना पूरा ध्यान और रिसोर्स साधारण चिप्स को छोड़कर महंगे HBM चिप्स के प्रोडक्शन पर लगा रही हैं। इसके चलते स्मार्टफोन और कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक DRAM (रैम) और NAND (स्टोरेज) चिप्स की सप्लाई में भारी गिरावट आ गई है।

आसमान छू रही हैं कीमतें: 80% तक का उछाल

चिप बाजार की मौजूदा स्थिति बेहद चौंकाने वाली है:

एआई का कब्जा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 में दुनिया भर में बनने वाली कुल मेमोरी चिप्स का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले एआई इंडस्ट्री डकार रही है।

दामों में आग: प्रमुख चिप निर्माता कंपनी Micron के अनुसार, हालिया तिमाही में ही DRAM चिप्स की कीमतें 60% से ज्यादा और डेटा स्टोर करने वाली NAND चिप्स की कीमतें 80% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

कार से लेकर गेमिंग कंसोल तक... सब पर पड़ेगा असर

यदि चिप्स की कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला नहीं थमा, तो टेक कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल देंगी।

प्रभावित होने वाले सेक्टर्ससंभावित असर
स्मार्टफोन और टैबलेटरैम और स्टोरेज महंगी होने से मिड-रेंज और फ्लैगशिप फोन के दाम बढ़ेंगे।
लैपटॉप और गेमिंग कंसोलपर्सनल कंप्यूटर और प्लेस्टेशन जैसे गेमिंग गियर्स की कीमतों में उछाल आएगा।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीआधुनिक स्मार्ट कारों में हजारों सेमीकंडक्टर्स लगते हैं, जिससे वाहनों की लागत बढ़ेगी।
क्लाउड सर्विसेजडेटा स्टोरेज महंगा होने से क्लाउड सब्सक्रिप्शन और डिजिटल सेवाएं महंगी होंगी।

 

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी चिंता?

भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है और तेजी से खुद को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Manufacturing) के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। ऐसे वैश्विक चिप संकट का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं और स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स पर पड़ेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत सरकार का महत्वाकांक्षी 'सेमीकंडक्टर मिशन' देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे भविष्य में वैश्विक उतार-चढ़ाव पर भारत की निर्भरता कम हो सकेगी।

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