वैश्विक मंदी के बावजूद भारत में क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खोल दिया राज

"जब कीमतें आसमान पर थीं, तब भारत ने आपको बचाया; अब बड़ी कटौती की उम्मीद जल्दबाजी"

02 Jul 2026  |  185

 

 

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद देश के आम उपभोक्ताओं के मन में एक ही सवाल है—आखिर भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता क्यों नहीं हो रहा? इस सुलगते सवाल पर अब केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि वैश्विक बाजार में आई गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत नहीं दिखता और फिलहाल तेल की कीमतों में किसी बड़ी कटौती की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।

होर्मुज संकट का उदाहरण: दुनिया जल रही थी, भारत सुरक्षित था

केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक ईंधन संकट का जिक्र करते हुए कहा कि होर्मुज संकट के दौरान दुनिया भर के देशों में हाहाकार मचा था और ईंधन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई थी। उस दौर में विकसित देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए थे, जबकि हमारे पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश) में औसतन 35 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

"इस भीषण वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने अपने आम उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं पड़ने दिया। जब दुनिया में दाम 20 से 35 फीसदी बढ़े, तब भारत में यह बढ़ोतरी महज 5 फीसदी के आसपास थी।" — हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री

“जब दाम बढ़े ही नहीं, तो बड़ी कटौती क्यों?”

मंत्री ने उन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा है कि कच्चा तेल 128 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 70 डॉलर पर आ गया है, तो पेट्रोल भी आधा सस्ता होना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

पूरी तस्वीर देखना जरूरी: भारत में कीमतें पहले ही उस स्तर तक नहीं बढ़ाई गईं थीं, जितनी दूसरे देशों में बढ़ीं। इसलिए अब अंतरराष्ट्रीय कीमतें सामान्य होने पर बड़ी कटौती की उम्मीद बेमानी है।

तुरंत नहीं मिलता गिरावट का फायदा: कच्चे तेल की खरीद से लेकर उसके परिवहन, रिफाइनिंग (शोधन) और वितरण (सप्लाई चेन) की एक लंबी प्रक्रिया होती है। कंपनियों की लागत में इस गिरावट का असर दिखने में वक्त लगता है।

तो क्या भविष्य में मिलेगी राहत?

राहत की उम्मीदों पर बात करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने एक सकारात्मक संकेत जरूर दिया। उन्होंने कहा कि यदि अगले दो से तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह कम और स्थिर बनी रहती हैं, तो निश्चित रूप से कीमतों को कम करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि फिलहाल इस बारे में कोई भी पक्का दावा करना जल्दबाजी होगी।

अन्य खबरें