जिले में बढ़ा शकरकंद का क्रेज: 360 हेक्टेयर तक पहुंचा रकबा, KVK सिखा रहा खेती के वैज्ञानिक गुर

अधिक बारिश और जलभराव से सड़ने वाली फसलों को बचाएगी नई तकनीक; कृषि विज्ञान केंद्र ने गांवों में शुरू किया लाइव प्रदर्शन।

06 Jul 2026  |  1091

 

 

शिवपुरी (कोलारस), 

जिले के किसानों का पारंपरिक फसलों से मोहभंग हो रहा है और वे अब उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। टमाटर, शिमला मिर्च, प्याज, लहसुन और कद्दू की सफल खेती के बाद, अब यहां के किसानों का रुझान 'शकरकंद' (Sweet Potato) की व्यावसायिक खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जिले में शकरकंद का रकबा बढ़कर लगभग 360 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

किसानों की इसी रुचि को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) द्वारा बेहतर उत्पादन और फसल सुरक्षा के लिए विशेष वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है।

जलभराव और कंद सड़न से मिलेगी मुक्ति

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान अत्यधिक बारिश के कारण शकरकंद की फसल में कंद सड़न (Root Rot) और फफूंदजनित (Fungal) रोगों की गंभीर समस्या देखी गई थी, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ था।

"इस खरीफ सीजन में किसानों को विशेष रोपण पद्धतियों (Planting Methods) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से यदि खेतों में जलभराव (Waterlogging) की स्थिति भी बनती है, तो भी फसल पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और कंद सड़ेंगे नहीं।" – डॉ. पुनीत कुमार, प्रमुख, KVK

खेतों में लाइव प्रदर्शन: वैज्ञानिकों की टोली पहुंची गांव-गांव

इस मुहिम के तहत केंद्र के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता खुद किसानों के बीच खेतों में पहुंच रहे हैं। वहां न सिर्फ समूह प्रशिक्षण (Group Training) आयोजित किए जा रहे हैं, बल्कि किसानों के प्रक्षेत्रों (Fields) पर आधुनिक रोपण पद्धतियों का व्यावहारिक व लाइव प्रदर्शन (Practical Demonstration) भी करके दिखाया जा रहा है।

कोलारस में विशेष कैंप:

इसी कड़ी में हाल ही में कोलारस विकासखंड के किलावनी और चंदौरिया गांवों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और वैज्ञानिक खेती के गुर सीखे।

उद्यानिकी विभाग और 'सृजन' संस्था का मिला साथ

कृषि विज्ञान केंद्र के इस अनूठे अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय उद्यानिकी विभाग और 'सृजन' सामाजिक संस्था भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रही है।

इस संयुक्त प्रयास का मुख्य उद्देश्य जिले के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की बेरुखी के अनुकूल तकनीक उपलब्ध कराना है, ताकि उद्यानिकी फसलों का उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो सके और किसानों को उनकी उपज का भरपूर दाम मिल सके।

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