मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा एलान: आम जनता की जेब सुरक्षित, केवल कमर्शियल वाहनों से ही वसूला जाएगा टोल टैक्स; बिना चुकाए सफर पर 3 गुना जुर्माना

बिहार में आज से नई टोल नीति लागू: सफेद नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ियों को बड़ी राहत; कमर्शियल वाहनों पर लगेगा टैक्स ,विपक्ष ने घेरा, सत्ता पक्ष ने बताया 'विकास की नीति' ।

07 Jul 2026  |  1198

 

कैचलाइन: 

पटना।

बिहार में यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने 'बिहार रोड यूजर फीस (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2026' के तहत एक नई टोल नीति का नोटिफिकेशन जारी कर इसे आज से पूरे राज्य में प्रभावी कर दिया है। इसके लागू होने से राज्य भर के कई स्टेट हाईवे, बाईपास और पुलों पर सफर का गणित बदल गया है।

इस नीति को लेकर आम जनता के बीच उपजे असमंजस को दूर करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि बिहार में निजी (सफेद नंबर प्लेट) वाहनों से कोई टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। टोल टैक्स की यह वसूली केवल पीले नंबर प्लेट वाले व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों से ही की जाएगी।

कैसा है नया टोल ढांचा और क्या हैं दरें?

पथ निर्माण विभाग अब राज्य की सड़कों पर यातायात के आकलन के आधार पर टोल प्लाजा तय करेगा और निजी एजेंसियों के माध्यम से शुल्क की वसूली की जाएगी।

सड़कों की चौड़ाई के हिसाब से टैक्स: नई व्यवस्था के तहत फोर लेन और उससे चौड़ी सड़कों पर 100 प्रतिशत तक, जबकि टू लेन से अधिक और फोर लेन से कम चौड़ी सड़कों पर 60 प्रतिशत तक टोल शुल्क देय होगा।

इन्हें मिली पूरी छूट: आम जनता और किसानों को राहत देते हुए टू-व्हीलर (मोटरसाइकिल), थ्री-व्हीलर (ऑटो), ट्रैक्टर और कंबाइन हार्वेस्टर को इस टोल नीति से पूरी तरह बाहर (छूट) रखा गया है।

कमर्शियल वाहनों का रेट चार्ट:

कमर्शियल वाहन श्रेणी (पीली प्लेट)निर्धारित दर (प्रति किलोमीटर)
कार, जीप और वैन₹1.25 प्रति किमी
बस और ट्रक₹4.25 प्रति किमी

 

लापरवाही पर भारी दंड: नई नियमावली के अनुसार, यदि कोई भी कमर्शियल वाहन बिना टोल चुकाए या नियमों का उल्लंघन कर यात्रा करता पकड़ा गया, तो उसे सामान्य दर से तीन गुना जुर्माना देना होगा।

नीति पर छिड़ा सियासी घमासान: वार-पलटवार तेज

नई टोल नीति के लागू होते ही बिहार की सियासत गरमा गई है और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखे बयानों का दौर शुरू हो गया है:

सत्ता पक्ष का तर्क (विकास के लिए जरूरी):

भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव ने नीति का बचाव करते हुए कहा, "सड़कों और पुलों का रखरखाव सरकारी राजस्व से ही होता है। सरकार के पास नोट छापने की मशीन नहीं है। विकास को गति देने के लिए राजस्व जुटाना जरूरी है।" वहीं, जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टोल कोई नई व्यवस्था नहीं है, बेहतर सड़क नेटवर्क के रखरखाव के लिए यह अनिवार्य है।

विपक्ष का प्रहार (महंगाई का बोझ):

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार लगातार जनता की जेब पर बोझ बढ़ा रही है। टोल बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने इसे परिवहन लागत बढ़ाने वाला जनविरोधी फैसला बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

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