E-20 पेट्रोल पर छिड़ा सियासी संग्राम: केजरीवाल का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, कहा— 'जनता पर जबरन थोपा जा रहा आधा सच'

ऑटो कंपनियों के ओनर मैनुअल और दावों में विरोधाभास; 'आप' संयोजक बोले— गाड़ी खराब हुई या माइलेज गिरी तो हर्जाना कौन देगा, मोदी सरकार या कंपनी?

07 Jul 2026  |  1082

 

 

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में ई-20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू करने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सरकार पर जनता से झूठ बोलने और ऑटो कंपनियों पर दबाव बनाकर भ्रामक दावे करवाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरे देश पर जबरदस्ती ई-20 पेट्रोल थोप रही है और भारी जनविरोध के बावजूद अपनी जिद पर अड़ी हुई है।

अरविंद केजरीवाल ने साफ किया कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे। वह इस हफ्ते सभी प्रमुख ऑटो कंपनियों को और अगले हफ्ते सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस नीति पर जवाब मांगेंगे।

सरकार ने ऑटो कंपनियों से बुलवाया झूठ!

एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि 3 जुलाई को केंद्र सरकार ने छह बड़ी ऑटो मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों (मारुति सुजुकी, टोयोटा, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई, बजाज और टीवीएस) को तलब किया था। सरकार चाहती थी कि ये कंपनियां संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता को आश्वस्त करें कि पुरानी गाड़ियों (E-0, E-5 या E-10 कंप्लायंट) में भी E-20 पेट्रोल डालने से कोई नुकसान नहीं होगा।

"इन छह में से तीन कंपनियों ने इतना बड़ा झूठ बोलने से साफ मना कर दिया। लेकिन मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प ने सरकारी दबाव में आकर जनता से झूठ बोला कि ई-20 से इंजन या फ्यूल टैंक को कोई नुकसान नहीं होगा, सिर्फ 5-7% माइलेज गिरेगी।" — अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय संयोजक, AAP

कंपनियों के 'ओनर मैनुअल' ने खोली पोल

केजरीवाल ने मारुति और टोयोटा जैसी कंपनियों की गाड़ियों के ओनर मैनुअल (Owner's Manual) का हवाला देते हुए उनके दावों की पोल खोली। उन्होंने कहा कि यह मैनुअल ग्राहक और कंपनी के बीच एक कानूनी कॉन्ट्रैक्ट की तरह होता है, जिसमें स्पष्ट लिखा है:

टोयोटा का मैनुअल: टोयोटा केवल 10% तक एथेनॉल मिश्रण (E-10) की अनुमति देता है। मैनुअल में साफ लिखा है कि अगर ड्राइव करने की क्षमता या माइलेज में दिक्कत आए, तो बिना अल्कोहल वाले शुद्ध पेट्रोल पर वापस आ जाएं।

मारुति सुजुकी का मैनुअल: बलेनो, डिजायर समेत सभी मॉडलों के मैनुअल में दर्ज है कि 10% से अधिक एथेनॉल वाले ईंधन का उपयोग न करें। अगर संतुष्टि न मिले, तो अल्कोहल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जब कंपनियों के आधिकारिक दस्तावेज 10% से ज्यादा एथेनॉल को इंजन के लिए हानिकारक बताते हैं, तो सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे सुरक्षित कैसे बता दिया गया?

कंपनियों और पीएम मोदी को लिखी जाएगी चिट्ठी

'आप' संयोजक ने अपने आगामी कदम की घोषणा करते हुए कहा कि वह बुधवार को झूठ बोलने वाली तीनों कंपनियों को पत्र लिखकर पूछेंगे कि क्या वे लिखित में गारंटी देंगी कि ई-20 ईंधन से गाड़ी खराब होने या माइलेज गिरने पर वे ग्राहकों को मुआवजा देंगी? अगर वे हाँ कह दें, तो देश भर में उनके प्लांट के बाहर दावों की लाइन लग जाएगी।

इसके साथ ही, केजरीवाल अगले हफ्ते प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा:

"मैं प्रधानमंत्री से पूछूंगा कि इस गलत और जबरन थोपे गए कदम के कारण यदि जनता की गाड़ियों के इंजन, फ्यूल सिस्टम खराब होते हैं या माइलेज कम होती है, तो इसका हर्जाना कौन भुगतेगा? जनता अपनी जेब से पैसा क्यों भरे? हर्जाना मोदी जी की सरकार देगी या ये ऑटो कंपनियां?"

क्या है E-10 और E-20 का गणित?

अरविंद केजरीवाल ने तकनीकी पहलू समझाते हुए बताया कि वर्ष 2023 से पहले भारत में बनने वाले अधिकांश वाहन शुद्ध पेट्रोल या अधिकतम 10% एथेनॉल मिश्रण (E-10) के लिए डिजाइन किए गए थे। 2023 के बाद से ई-20 कंप्लायंट गाड़ियां बनने लगी हैं। ऐसे में 2023 से पहले की करोड़ों गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल का इस्तेमाल उनके इंजन और फ्यूल सिस्टम को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचा सकता है, जिसे सरकार छुपा रही है।

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