ममता बनर्जी को तगड़ा झटका: TMC के 3 बैंक खाते फ्रीज, ₹440 करोड़ सीज; चार्टर्ड विमान सौदे में ED का बड़ा एक्शन

"मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई—पार्टी फंड से खरीदे गए थे प्राइवेट जेट और हेलीकॉप्टर; कोलकाता में 5 ठिकानों पर छापेमारी से मचा हड़कंप"

08 Jul 2026  |  1156

 

 

कोलकाता।

पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई करते हुए टीएमसी से जुड़े तीन बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया है। बताया जा रहा है कि इन बैंक खातों में करीब 440 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा है। पार्टी खातों के जरिए हुए कथित संदेहास्पद लेनदेन, चार्टर्ड विमानों और हेलीकॉप्टरों की खरीद के सिलसिले में ईडी ने कोलकाता में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।

चार्टर्ड विमान और 'अगस्ता वेस्टलैंड' हेलीकॉप्टर का संदिग्ध कनेक्शन

दरअसल, यह पूरा मामला टीएमसी के बैंक खातों से कथित हेरफेर कर ‘एम्ब्रेयर’ विमान और ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ हेलीकॉप्टर खरीदे जाने से जुड़ा है। ईडी की टीमों ने कोलकाता में लगभग 5 महत्वपूर्ण ठिकानों पर रेड की। इसमें ‘केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के दफ्तर और परिसर भी शामिल हैं, जो ‘केयरवेल एविएशन’ के नाम से प्राइवेट जेट किराए पर देने का काम करती है।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे: ऐसे हुआ पैसों का खेल

प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती जांच में जो वित्तीय ट्रांजैक्शन सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

₹160 करोड़ का ट्रांसफर: अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये ‘केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ और उसकी सहयोगी यूनिट्स के खातों में भेजे गए।

शेल कंपनी का अंदेशा: इसके बाद इस एविएशन कंपनी ने साल 2023 से 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये की एक और बड़ी राशि एक नई कंपनी के खाते में ट्रांसफर की।

विमानों की खरीद और विदेशी फंडिंग: इस पूरी रकम में से 112 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ‘एम्ब्रेयर लिगेसी 600’ कॉरपोरेट विमान और ‘अगस्ता वेस्टलैंड 109एसपी’ हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए किया गया। जांच में यह भी पता चला है कि हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए विदेशों से मिले फंड का भी इस्तेमाल हुआ, जिसका सीधा सोर्स टीएमसी के बैंक खाते ही थे। बाद में इन्हीं विमानों को दोबारा टीएमसी को ही किराए पर दे दिया गया।

"विमानों के इस्तेमाल के नाम पर मोटी रकम का संदेहास्पद लेनदेन हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस सौदेबाजी के असली लाभार्थियों और चेहरों को छिपाने के लिए शेल कंपनियों का मुखौटा तैयार किया गया था।" — प्रवर्तन निदेशालय (ED)

कैसे खुला यह पूरा राज?

इस पूरे मामले की शुरुआत टीएमसी के भीतर मचे आंतरिक घमासान के बाद हुई। पार्टी में कलह के बाद बागी विधायकों ने पार्टी कोष (Party Fund) में जमा पैसों के मुख्य सोर्स की जांच कराने की मांग उठाई थी। इसके बाद कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टीएमसी के 3 बैंक खातों से होने वाले वित्तीय लेन-देन और निकासी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट कलकत्ता हाई कोर्ट भी पहुंचा है, लेकिन इसी बीच ईडी की इस बड़ी एंट्री और जब्ती ने पार्टी की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

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