'प्रिंस ऑफ कोलकाता' को जन्मदि पर दुनिया का सबसे बड़ा तोहफा: ICC 'हॉल ऑफ फेम' में शामिल होंगे सौरव गांगुली

54वें जन्मदिन पर 'दादा' को सलाम; इस एलीट क्लब में जगह बनाने वाले बनेंगे भारत के 12वें क्रिकेटर, विदेशी पिचों पर टीम इंडिया को जीतना सिखाने वाले लीडर को आईसीसी का सर्वोच्च सम्मान।

08 Jul 2026  |  1021

 

खेल डेस्क।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास को अपने आक्रामक तेवरों और बेमिसाल कप्तानी से बदलने वाले पूर्व दिग्गज कप्तान सौरव गांगुली आज (8 जुलाई, 2026) अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस ऐतिहासिक और खास मौके पर जहां देश-दुनिया के फैंस और खेल जगत के दिग्गज उन्हें सोशल मीडिया पर बधाइयां दे रहे हैं, वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 'दादा' के फैंस को अब तक का सबसे बड़ा विजुअल ट्रीट दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीसी ने सौरव गांगुली के शानदार और ऐतिहासिक क्रिकेटिंग करियर को सलाम करते हुए उन्हें अपने प्रतिष्ठित ‘हॉल ऑफ फेम’ (Hall of Fame) में शामिल करने का बड़ा फैसला लिया है।

यह गौरव पाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर बनेंगे गांगुली

आईसीसी के इस सबसे बड़े और एलीट क्लब में शामिल होते ही सौरव गांगुली खेल इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे। वे यह सर्वोच्च सम्मान पाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर (महिला और पुरुष मिलाकर) और देश के सिर्फ 10वें पुरुष खिलाड़ी बनेंगे। इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के डेढ़ दशक से भी अधिक समय बाद मिला यह सम्मान साबित करता है कि विश्व क्रिकेट में 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के योगदान का कद आज भी कितना ऊंचा है।

आंकड़ों की जुबानी: 'दादा' का बेमिसाल इंटरनेशनल करियर

1992 में महज 20 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले सौरव गांगुली ने 16 सालों तक वर्ल्ड क्रिकेट के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ी। नीचे दी गई तालिका से समझें उनके करियर की विशालता:

क्रिकेट फॉर्मेटकुल मैचबनाए गए रनकप्तानी (मैच)जीत (कप्तानी में)
वनडे (ODI)31111,36314676
टेस्ट (Test)1137,2124921
कुल (Total)42418,57519597

वो लीडर, जिसने बदला भारतीय क्रिकेट का 'DNA'

सौरव गांगुली को सिर्फ उनके रनों या जीत-हार के आंकड़ों के लिए याद नहीं किया जाता। वे एक ऐसे कप्तान थे जिन्होंने 90 के दशक की 'घरेलू शेर' मानी जाने वाली भारतीय टीम की मानसिकता को बदला। गांगुली ने टीम इंडिया को विदेशी पिचों (गाबा, लॉर्ड्स, लीड्स) पर जाकर विरोधियों की आंख में आंख डालकर मैच जीतना सिखाया। वर्ष 2002 में लॉर्ड्स के बालकनी में जर्सी लहराने का उनका वो ऐतिहासिक पल आज भी हर भारतीय के जहन में ताजा है।

भविष्य के कप्तानों और दिग्गजों के 'गॉडफादर'

गांगुली के भीतर हुनर को पहचानने की अद्भुत कला थी। उन्होंने अपने कप्तानी के दौर में कई ऐसे युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और उन्हें बैक किया, जिन्होंने आगे चलकर भारत को दो-दो वर्ल्ड कप जिताए।

गांगुली की खोज: युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, वीरेंद्र सहवाग, जहीर खान, हरभजन सिंह और आशीष नेहरा।

साल 2008 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी दादा बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (CAB) के अध्यक्ष, फिर बीसीसीआई (BCCI) के बॉस और वर्तमान में विभिन्न प्रशासनिक भूमिकाओं के जरिए खेल को आगे बढ़ा रहे हैं। जन्मदिन पर आईसीसी का यह 'हॉल ऑफ फेम' सम्मान उनके क्रिकेट सफर का सबसे खूबसूरत मुकुट है।

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