वाशिंगटन / न्यूयॉर्क। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में लंबे समय तक रही रुकावट के बीच एक बेहद चौंकाने वाला आर्थिक खुलासा हुआ है। फाइनेंशियल टाइम्स और रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया के इस युद्ध संकट का सबसे बड़ा वित्तीय फायदा अमेरिका की दिग्गज तेल कंपनियों (एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन) को मिला है। इन कंपनियों ने संकट काल में रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमाया है।
दूसरी ओर, इसी दौरान अमेरिका के भीतर आम नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गैसोलीन (ईंधन) की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन कंपनियों पर 'दाम बढ़ाकर अनुचित मुनाफा कमाने' (Price Gouging) के गंभीर आरोपों के तहत एक बड़ी जांच शुरू करवा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि तेल कंपनियां जंग की आड़ में जनता को लूटना बंद करें।
होर्मुज संकट: कच्चे तेल में उछाल से कंपनियों की चांदी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई रुकावट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया।
कच्चे तेल के दाम: इस अवधि में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव करीब 96.68 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि अप्रैल में यह 109.27 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
मुनाफे की सुनामी: तेल महंगा होने और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन के कारण बड़ी कंपनियों की कमाई तेजी से बढ़ी। विश्लेषकों का मानना है कि दूसरी तिमाही में तेल कंपनियों का यह प्रदर्शन साल 2022 के बाद का सबसे मजबूत प्रदर्शन है।
एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन का अनुमानित मुनाफा (दूसरी तिमाही)
| कंपनी | अनुमानित शुद्ध लाभ (Q2) | पहली तिमाही के मुकाबले बढ़त |
|---|---|---|
| एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) | $15.7 से $15.9 अरब | लगभग 3 गुना अधिक (कमाई में $5 अरब का अतिरिक्त फायदा) |
| शेवरॉन (Chevron) | $9.7 से $10.0 अरब | लगभग 3 गुना अधिक |
नोट: एक्सॉनमोबिल अपने वास्तविक वित्तीय नतीजे 31 जुलाई को जारी करेगी।
गैसोलीन की कीमतों पर ट्रंप ने खोला मोर्चा
तेल कंपनियों की छप्परफाड़ कमाई के बीच अमेरिकी नागरिकों को महंगे ईंधन का दंश झेलना पड़ रहा है। गैसबडी के पेट्रोलियम विश्लेषण प्रमुख पैट्रिक डी हान के अनुसार, 4 जुलाई तक अमेरिका में गैसोलीन का राष्ट्रीय औसत दाम 3.755 डॉलर प्रति गैलन था। हालांकि, यह मई में बने 4.50 डॉलर प्रति गैलन के चार साल के उच्च स्तर से कुछ कम जरूर है, लेकिन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अब भी 0.65 डॉलर प्रति गैलन ज्यादा है।
राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि गैसोलीन की कीमतें तुरंत घटाकर 2.25 से 2.50 डॉलर प्रति गैलन के दायरे में लाई जाएं। ट्रंप का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का सीधा फायदा आम अमेरिकी जनता तक पहुंचना चाहिए। इस संबंध में ट्रंप प्रशासन ने न्याय विभाग (Department of Justice) को जांच के कड़े निर्देश दिए हैं और राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों से भी सहयोग मांगा है।
कंपनियों की सफाई: "सस्ता होने में लगता है समय"
दूसरी ओर, चौतरफा घिरी तेल कंपनियों और अमेरिकी ईंधन उद्योग ने इन आरोपों पर अपनी सफाई पेश की है। कंपनियों का तर्क है कि कच्चे तेल की कीमतें घटने और आम पेट्रोल पंपों तक गैसोलीन सस्ता होने के बीच एक 'टाइम लैग' (समय का अंतर) होता है।
शेवरॉन की मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) ईमेयर बोनर ने कहा:
"जैसे-जैसे भू-राजनीतिक बाजार सामान्य होगा, वैसे-वैसे गैसोलीन की कीमतों में भी कमी आएगी। रिफाइनरियां खुद गैसोलीन की अंतिम कीमत तय नहीं करतीं। ईंधन की कीमत में कच्चे तेल के अलावा रिफाइनिंग, परिवहन, टैक्स और परिचालन के अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। मौजूदा हालात एक चक्रीय बाजार (Cyclical Market) का हिस्सा हैं।"
निष्कर्ष: अब अमेरिकी न्याय विभाग की इस जांच पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह जांच तय करेगी कि क्या वास्तव में इन दिग्गज कॉरपोरेट्स ने वैश्विक अस्थिरता और युद्ध के संकट का फायदा उठाकर आम जनता की जेब पर डाका डाला है, या फिर यह मुक्त बाजार की एक सामान्य प्रक्रिया है।