छत्तीसगढ़ सरकार का ऐतिहासिक कदम: 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026' को मंजूरी; ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना

लाइसेंस राज और लालफीताशाही पर कड़ा प्रहार; 'डीम्ड परमिशन' और डिजिटल पारदर्शिता से खुलेगा छत्तीसगढ़ में निवेश और बंपर रोजगार का रास्ता।

10 Jul 2026  |  1168

 

 

रायपुर।

छत्तीसगढ़ को देश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने और राज्य में निवेश की रफ्तार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार ने 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक 2026' के प्रारूप को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस क्रांतिकारी कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य में व्यापार और नए उद्योग स्थापित करने की जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध (Time-bound) बनाना है।

सरकार का दावा है कि उद्योग और व्यापार जगत को प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए इस तरह का अनूठा विधेयक लागू करने वाला छत्तीसगढ़ पूरे देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।

विधेयक के 5 प्रमुख प्रावधान, जो बदल देंगे कारोबारी माहौल

नए कानून के लागू होने से निवेशकों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और फाइलों के अटके रहने की समस्या से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी। इस विधेयक में कई अत्याधुनिक और उद्योग-अनुकूल प्रावधान शामिल किए गए हैं:

डीम्ड परमिशन (Deemed Permission): यदि तय समयसीमा के भीतर किसी उद्योग को सरकारी विभाग से अनुमति नहीं मिलती है, तो उसे स्वतः स्वीकृत (Approved) मान लिया जाएगा।

स्व-प्रमाणीकरण (Self-Certification): निवेशक खुद के दस्तावेजों और नियमों के पालन की जिम्मेदारी स्वयं प्रमाणित करके काम शुरू कर सकेंगे।

तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-Party Verification): प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए अधिकृत थर्ड-पार्टी से वेरिफिकेशन की सुविधा मिलेगी।

जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-Based Inspection): अब बिना वजह हर उद्योग का बार-बार निरीक्षण नहीं होगा, बल्कि केवल जोखिम के आधार पर ही तयशुदा व्यवस्था के तहत जांच होगी।

दोहरे लाइसेंसिंग की समाप्ति: एक ही काम के लिए अलग-अलग विभागों से बार-बार लाइसेंस लेने की दोहरी बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार, पैदा होंगे लाखों रोजगार

छत्तीसगढ़ सरकार का दृढ़ विश्वास है कि यह नया कानून राज्य के औद्योगिक परिदृश्य की पूरी तस्वीर बदल देगा। इस नीतिगत सुधार से न केवल देश-विदेश के बड़े निवेशकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित किया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय छोटे व मध्यम उद्यमियों (MSMEs) को भी फलने-फूलने का एक बेहतरीन और अनुकूल माहौल मिलेगा।

रोजगार के नए क्षितिज:

जब व्यापार करना आसान होगा, तो राज्य में तेजी से नए कारखाने और स्टार्टअप्स स्थापित होंगे। उद्योगों के इस नए जाल से छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए और सुनहरे अवसर सृजित होंगे।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम देश के आर्थिक मानचित्र पर राज्य को एक प्रगतिशील और निवेश-अनुकूल प्रदेश के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा। लालफीताशाही को खत्म करने वाला यह कानून आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक रोल मॉडल बन सकता है।

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