राज्यसभा में 'मिशन 164': विपक्ष में बिखराव से दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा NDA

राजनीतिक हलचल: उच्च सदन में भगवा का दबदबा, AAP और TMC की टूट ने बदली तस्वीर ।

10 Jul 2026  |  599

 

नई दिल्ली: देश की सियासत में इन दिनों विपक्ष के बिखराव और टूट की पटकथा ने संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) का पूरा गणित बदल कर रख दिया है। एक समय जहां सत्ताधारी दल के लिए राज्यसभा में बिल पास कराना एक बड़ी चुनौती हुआ करता था, वहीं अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/NDA) ऐतिहासिक दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गया है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और विपक्षी खेमे में लगी बड़ी सेंध ने भाजपा को संसद के इस सदन में अप्रत्याशित रूप से मजबूत कर दिया है।

बंगाल से दिल्ली तक 'ऑपरेशन लोटस' की धमक

इस सियासी फेरबदल की सबसे ताजा और बड़ी तस्वीर पश्चिम बंगाल से सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बड़े राज्यसभा सांसदों—सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक—ने पार्टी और सदन की सदस्यता से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। कयासों के मुताबिक, इन तीनों ने भाजपा का दामन थाम लिया है।

बीजेपी ने भी बिना देर किए आगामी 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में इन तीनों को ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के ऐतिहासिक बहुमत को देखते हुए इन तीनों ही प्रत्याशियों की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है।

क्या कहते हैं राज्यसभा के आंकड़े?

बंगाल के इन तीन नए सदस्यों के आने के बाद उच्च सदन का समीकरण पूरी तरह बदलने वाला है:

भाजपा की खुद की ताकत: 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा के पास वर्तमान में 114 सदस्य हैं। तीन नए सदस्यों की जीत के बाद यह संख्या 117 हो जाएगी।

NDA का बढ़ता कुनबा: भाजपा के सहयोगी दलों के पास 26 सदस्य हैं। यदि इसमें हाल ही में झारखंड से जीतकर आए 3 भाजपा-समर्थित निर्दलीय सांसदों को जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा 146 तक पहुंच जाता है।

मनोनीत सदस्यों का साथ: सदन के 7 नामित (मनोनीत) सदस्यों का परोक्ष समर्थन भी हमेशा सत्ता पक्ष के साथ रहता है। इन्हें मिलाते ही NDA का आंकड़ा 153 पर पहुंच जाता है।

दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा: राज्यसभा में ऐतिहासिक दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों की आवश्यकता होती है। इस गणित के हिसाब से NDA अब जादुई आंकड़े से महज 11 कदम (सांसद) दूर रह गया है।

AAP और TMC की टूट ने बदली तस्वीर

NDA को इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचाने में आम आदमी पार्टी (AAP) की बड़ी टूट ने सबसे मुख्य भूमिका निभाई है। याद दिला दें कि इसी साल अप्रैल में 'आप' के 7 दिग्गजों—राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी ने पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा सांसद के रूप में शपथ ली थी।

आगे की राह और आसान? सियासी गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि तृणमूल कांग्रेस के बचे हुए 10 राज्यसभा सांसदों में से भी 3-4 सदस्य जल्द ही पाला बदल सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो भाजपा को दो-तिहाई बहुमत के लिए महज 7 से 8 सांसदों की जरूरत होगी, जिसे जुटाना सरकार के लिए बेहद आसान हो जाएगा। इस ऐतिहासिक बहुमत के बाद सरकार के लिए बड़े संवैधानिक संशोधनों की राह पूरी तरह निष्कंटक हो जाएगी।

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