WhatsApp Username फीचर पर सरकार के नोटिस का कंपनी ने दिया जवाब, जानिए क्या साइबर ठगों के लिए बंद होंगे रास्ते?

बिना फोन नंबर चैटिंग वाले इस नए फीचर से 'डिजिटल अरेस्ट' और 'इम्पर्सनेशन स्कैम' बढ़ने का सता रहा था डर; मेटा ने सरकार को सौंपा सुरक्षा प्लान, आईटी मंत्रालय कर रहा है जांच।

10 Jul 2026  |  562

 

 

नई दिल्ली: मेटा (Meta) के पॉपुलर इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप (WhatsApp) के आगामी 'यूज़रनेम' (Username) फीचर को लेकर मचे सियासी और तकनीकी घमासान में एक नया मोड़ आया है। इस फीचर से साइबर अपराध बढ़ने की आशंका जताते हुए सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस का वॉट्सऐप ने आखिरकार जवाब दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय को गुरुवार को यह जवाब प्राप्त हुआ है, जिसकी अब बारीकी से जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कड़ी चिंता जताते हुए वॉट्सऐप को साफ निर्देश दिया था कि जब तक सरकार इस फीचर की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक इसे भारत में लॉन्च नहीं किया जाएगा।

क्यों चिंतित थी सरकार? नोटिस में दी थी क्या चेतावनी

केंद्र सरकार ने पिछले दिनों मेटा को नोटिस जारी कर पूछा था कि इस नए फीचर को लेकर आईटी (IT) एक्ट और नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए? सरकार की मुख्य चिंताएं निम्नलिखित थीं:

स्कैमर्स को छिपाने का मौका: इस फीचर के आने के बाद यूजर्स बिना अपना फोन नंबर शेयर किए किसी से भी बात कर सकेंगे। सरकार को डर है कि इससे अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने में मदद मिलेगी।

अपराधों में बाढ़ की आशंका: बिना नंबर के पहचान छुपाकर 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम', ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग और इम्पर्सनेशन अटैक (किसी और का रूप धरकर ठगी करना) जैसी वारदातें तेजी से बढ़ सकती हैं।

ड्यू-डिलिजेंस का उल्लंघन: सरकार ने याद दिलाया कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरी होने के नाते वॉट्सऐप नियमों के तहत जरूरी सावधानी बरतने (Due-Diligence) की कानूनी जिम्मेदारी से बंधा हुआ है।

सुरक्षा के लिए WhatsApp ने क्या दिया जवाब?

नोटिस मिलने के बाद मेटा की एक उच्च स्तरीय टीम ने आईटी मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की थी। अब लिखित जवाब में वॉट्सऐप ने सरकार को आश्वस्त करने के लिए अपने 'सुरक्षा चक्र' का पूरा प्लान सामने रखा है:

1. रैंडम चैटिंग पर रोक: वॉट्सऐप पर किसी अनजान व्यक्ति को आपसे चैट करने के लिए आपका बिल्कुल सटीक यूजरनेम पता होना अनिवार्य होगा। 2. बार-बार अनुमान लगाने पर ब्लॉक: अगर कोई सॉफ्टवेयर या स्कैमर बार-बार यूजरनेम का अनुमान लगाकर (Hit and Trial) लोगों को ढूंढने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम उसे तुरंत रोक देगा। 3. नए खातों की लिमिटेशन: कंपनी एक सीमा तय करेगी कि कोई नया यूजरनेम खाता एक बार में कितने अनजान लोगों से संपर्क कर सकता है। 4. स्कैमर्स की पहचान और प्रोफ़ाइल वार्निंग: किसी भी व्यक्ति के जवाब देने से पहले वॉट्सऐप स्क्रीन पर यह साफ-साफ दिखाएगा कि मैसेज भेजने वाला कोई नया अकाउंट है, पुराना कॉन्टैक्ट है, किसी आपसी ग्रुप (Mutual Group) का मेंबर है या फिर किसी दूसरे देश से मैसेज कर रहा है।

टेलीग्राम और सिग्नल भी रडार पर

आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने 'सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट' के दौरान इस बात की पुष्टि की कि वॉट्सऐप का जवाब तय समय सीमा यानी गुरुवार को मिल गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ऐसे ही यूजरनेम फीचर वाले दो अन्य ऐप्स टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) ने नोटिस का जवाब दिया है, तो उन्होंने कहा:

"उन्हें जवाब देने के लिए अभी थोड़ा और समय दिया गया है, इसलिए उनके जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। हम सभी के जवाबों और सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच करेंगे।"

आगे क्या होगा? फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है। आईटी मंत्रालय के अधिकारी अब वॉट्सऐप द्वारा दिए गए तकनीकी दावों की समीक्षा कर रहे हैं। यदि सरकार इन सुरक्षा उपायों से संतुष्ट होती है, तभी भारत के करोड़ों यूजर्स को बिना फोन नंबर शेयर किए 'वॉट्सऐप यूजरनेम' बनाने की अनुमति मिल पाएगी।

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