दवाओं के नाम पर 'नशे के खेल' पर सरकार का कड़ा प्रहार: 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली दवाओं के लिए लाइसेंस और डॉक्टर का पर्चा अनिवार्य

बदले नियम, कस गया शिकंजा; टिंचर, अदरक और इलायची अर्क जैसी औषधियों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अनुसूची-K की छूट की खत्म।

11 Jul 2026  |  880

 

 

नई दिल्ली।

देश में दवाओं के नाम पर होने वाले नशे और उनके अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को सरकार ने अधिक मात्रा में एथिल अल्कोहल (इथेनॉल) युक्त औषधीय फॉर्मूलेशनों (दवाओं) के नियमन (Regulations) को बेहद सख्त कर दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना के अनुसार, अब ऐसी दवाओं के निर्माण और बिक्री के लिए दवा लाइसेंस के साथ-साथ डॉक्टर का पर्चा (Prescription) होना अनिवार्य होगा।

सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य वास्तविक मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता बनाए रखते हुए, इनके नशे के रूप में हो रहे दुरुपयोग और ब्लैक मार्केटिंग पर पूरी तरह लगाम लगाना है।

क्यों पड़ी कड़े नियमों की जरूरत? (80-90% अल्कोहल का खेल)

मंत्रालय के अनुसार, इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित औषधीय फॉर्मूलेशन की टिंचर (अर्क) जैसी कई दवाओं को पहले 'अनुसूची-के' (Schedule-K) के तहत लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं से छूट मिली हुई थी।

नशे के लिए इस्तेमाल: जांच में सामने आया कि इनमें से कुछ उत्पादों में 80 से 90 प्रतिशत तक एथाइल अल्कोहल होता है। इस वजह से कई लोग इन दवाओं को कफ सिरप या अर्क के बजाय नशे के उद्देश्य से खरीद और बेच रहे थे। कुछ राज्य सरकारों ने भी इस गंभीर ट्रेंड को लेकर चिंता जताई थी और केंद्र सरकार को कड़े कदम उठाने के सुझाव भेजे थे।

अब किन दवाओं पर लागू होंगे नए नियम?

नए संशोधन के बाद अब निम्नलिखित मापदंडों वाली दवाओं को बिना लाइसेंस या पर्चे के नहीं बेचा जा सकेगा:

अल्कोहल की मात्रा: जिन भी दवाओं में 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल होगा।

पैकिंग का साइज: जो दवाएं 30 मिलीलीटर (ml) से अधिक की पैकिंग में बाजार में उपलब्ध होंगी।

ये सभी औषधीय तैयारियां अब 'अनुसूची-के' के तहत मिलने वाली छूट के दायरे से बाहर होंगी। इसके तहत अब इनके निर्माताओं और विक्रेताओं को 'औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940' के तहत आवश्यक लाइसेंस लेना ही होगा।

अनुसूची-H1 में शामिल: रखना होगा खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड

इस संशोधन के तहत इन अल्कोहल युक्त दवाओं को 'ड्रग्स रूल्स, 1945' की अनुसूची-एच1 (Schedule-H1) में शामिल कर दिया गया है।

पंजीकृत डॉक्टर का पर्चा: अब ये दवाएं केवल एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (डॉक्टर) के लिखित पर्चे पर ही बेची जा सकेंगी।

विस्तृत रिकॉर्ड: दवा दुकानदारों को इन दवाओं की हर एक बोतल की खरीद और बिक्री का पूरा और विस्तृत रिकॉर्ड (रजिस्टर या डिजिटल डेटा) संभाल कर रखना होगा, जिसकी कभी भी ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा जांच की जा सकती है।

फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन होगी मजबूत, मरीजों को राहत

मंत्रालय का कहना है कि इस संशोधित व्यवस्था से अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों की रेगुलेटरी निगरानी और नियंत्रण बेहद मजबूत होगा। यह पक्का किया जा सकेगा कि इनकी सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन केवल विनियमित दवा वितरण प्रणाली (Regulated Pharmaceutical Supply Chain) के माध्यम से ही हो।

यह कदम देश की दवा नियामक व्यवस्था को और मजबूत बनाने, औषधीय उत्पादों के विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का एक अहम हिस्सा है।

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