'शहीद' बनेंगी या सरकार की वैधता छीन लेंगी? दिसंबर में शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी का ऐलान, ब्रह्म चेलानी बोले—चल दिया सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक

प्रत्यर्पण की मांग के बीच हसीना का खुद सरेंडर करने का फैसला; ढाका के अधिकारियों के पास नहीं बचा कोई सुरक्षित रास्ता, अवामी लीग में नई जान फूंकने की तैयारी।

11 Jul 2026  |  1049

 

 

नई दिल्ली/ढाका।

अगस्त 2024 में हुए प्रचंड छात्र आंदोलन और तख्तापलट के बाद से भारत में रह रहीं बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक ऐसा राजनीतिक दांव चल दिया है, जिसने ढाका की अंतरिम सरकार की नींद उड़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, शेख हसीना अपनी पार्टी 'अवामी लीग' को फिर से जीवित और मजबूत करने के लिए दिसंबर 2026 तक ढाका लौटने और खुद को कानून के हवाले (सरेंडर) करने की तैयारी कर रही हैं।

इस अभूतपूर्व फैसले पर जाने-माने जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट (भू-राजनीतिक विश्लेषक) ब्रह्म चेलानी का कहना है कि बांग्लादेश लौटने का यह फैसला शेख हसीना का एक ऐसा चक्रव्यूह है, जिससे निकलने का कोई अच्छा विकल्प अब ढाका के अधिकारियों के पास नहीं बचा है।

कथित भगोड़े से 'कानून का सामना करने वाली नेता' की छवि

ब्रह्म चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि शेख हसीना का दिसंबर में बांग्लादेश लौटने और खुद सरेंडर करने का ऐलान एक बहुत बड़ा और सोचा-समझा राजनीतिक दांव है।

ब्रह्म चेलानी का विश्लेषण: "अपनी शर्तों पर स्वदेश लौटकर, हसीना खुद को एक कथित भगोड़े की छवि से बाहर निकाल लेंगी। वह दुनिया के सामने एक ऐसी साहसी नेता के तौर पर पेश होंगी जो कानूनी कार्रवाई का सामना करने को तैयार है। ऐसा करके वह पूरी राजनीतिक और नैतिक ज़िम्मेदारी मौजूदा सरकार के कंधों पर डाल देंगी।"

प्रत्यर्पण मुहिम बेअसर, ढाका सरकार के सामने दोधारी तलवार

भारतीय एक्सपर्ट के अनुसार, खुद सरेंडर करने का कदम उठाकर शेख हसीना ने राजनीतिक बढ़त (पहल) अपने हाथ में ले ली है। इससे ढाका की अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण (Extradition) मुहिम पूरी तरह बेअसर हो जाएगी। अब बांग्लादेश सरकार के सामने दो बेहद मुश्किल रास्ते हैं:

रास्ता 1 (शहीद बनाने का जोखिम): यदि सरकार हसीना को जेल में डालती है या सख्त सजा देती है, तो वह जनता की नजरों में एक राजनीतिक 'शहीद' (Martyr) बन जाएंगी, जिससे उनके प्रति सहानुभूति लहर पैदा हो सकती है।

रास्ता 2 (बदले की भावना का आरोप): यदि उन पर आनन-फानन में मुकदमा चलाया जाता है, तो सरकारी नियंत्रण वाली न्यायपालिका पर 'राजनीतिक प्रतिशोध' और बदले की भावना से काम करने के आरोप लगेंगे। दोनों ही सूरतों में यह मुकदमा मौजूदा सरकार की वैधता पर एक जनमत संग्रह (Referendum) में बदल जाएगा।

मौत की सजा का सामना करने को तैयार, समर्थकों में भारी उत्साह

गौरतलब है कि नवंबर 2024 में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई को 'मानवता के खिलाफ अपराध' मानते हुए शेख हसीना की अनुपस्थिति में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही बांग्लादेश की नई सरकार भारत से लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही थी।

अवामी लीग के सूत्रों और समर्थकों का कहना है कि शेख हसीना इस सजा या किसी भी अन्य परिणाम का सामना करने से बिल्कुल नहीं डरती हैं। अवामी लीग की प्रचार उप-समिति के सदस्य काजी नसीम रूपक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम सभी अपनी नेता का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारी नेता पहले ही कह चुकी हैं कि वह हर स्थिति से टकराने को तैयार हैं, और उनके हर निर्देश का पालन करने के लिए पार्टी कार्यकर्ता मैदान में मुस्तैद हैं।" इस बड़े ऐलान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भारी उथल-पुथल की आशंका बढ़ गई है।

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