तेल बाजार पर मंडराया 'महा संकट': अमेरिका-ईरान तनाव से पेट्रोल डीजल की कीमतें भड़कने की आशंका, IEA की बड़ी चेतावनी

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो रोज थमेगी 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई; बारूद के ढेर पर बैठी वैश्विक अर्थव्यवस्था, बढ़ सकता है महंगाई का चौतरफा दबाव।

11 Jul 2026  |  830

 

 

पेरिस/नई दिल्ली।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब दुनिया भर के ऊर्जा बाजार की धड़कनें बढ़ा दी हैं। 'अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी' (IEA) ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच जारी यह तनातनी वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। अगर यह तनाव एक बड़े युद्ध का रूप लेता है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की ईंधन सप्लाई पर पड़ेगा, जिससे भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

IEA के अनुसार, यद्यपि वैश्विक तेल बाजार इस समय धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) का यह भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Risk) सुधार के इस सिलसिले को किसी भी वक्त पूरी तरह पलट सकता है।

हॉर्मुज स्ट्रेट: दुनिया की 'लाइफलाइन' पर मंडराया खतरा

IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ा और वास्तविक खतरा हॉर्मुज स्ट्रेट (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) से जुड़ा है, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है।

रोजाना 1.4 करोड़ बैरल तेल पर ब्रेक: खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है। यदि अमेरिका-ईरान टकराव के कारण हॉर्मुज का यह रास्ता बाधित या बंद हो जाता है, तो रोजाना लगभग 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है। इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई रुकने से वैश्विक स्तर पर ईंधन का भीषण अकाल पड़ जाएगा।

आम जनता की जेब और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर होगा सीधा प्रहार

महंगे ईंधन की मार: पश्चिम एशिया दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक क्षेत्र है। यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक होगा। तेल की किल्लत होते ही पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन (ATF) के दाम तेजी से बढ़ेंगे।

महंगाई का चौतरफा दबाव: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर माल ढुलाई और परिवहन लागत पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आम जनता की जेब पर सीधा प्रहार होगा और दुनिया भर में कड़े आर्थिक सुधारों के बाद काबू में आई महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है।

फिलहाल पर्याप्त है स्टॉक, लेकिन खतरा बरकरार

राहत की बात यह है कि IEA के अनुसार वर्तमान में वैश्विक बाजार में तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है। लेकिन एजेंसी ने साफ शब्दों में आगाह किया है कि बाजार इस समय 'कांच के घर' जैसा बेहद संवेदनशील है। अगर वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव की एक भी चिंगारी भड़की, तो मौजूदा संतुलन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा।

क्या OPEC+ और अन्य उत्पादक देश बचा पाएंगे संकट से?

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि 'ओपेक प्लस' (OPEC+) समूह के देश धीरे-धीरे अपनी पुरानी उत्पादन कटौती को वापस ले रहे हैं और जरूरत पड़ने पर बाजार में अतिरिक्त कच्चा तेल जारी कर सकते हैं। इसके साथ ही ओपेक के बाहर के कुछ देश भी अपना प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं।

हालांकि, IEA का मानना है कि ये तमाम वैकल्पिक उपाय केवल आंशिक राहत दे सकते हैं। अगर मुख्य खाड़ी क्षेत्र से होने वाला निर्यात ही पूरी तरह प्रभावित हो गया, तो दुनिया का कोई भी अतिरिक्त उत्पादन इस भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाएगा। फिलहाल दुनिया भर के निवेशक और सरकारें अमेरिका-ईरान के हर घटनाक्रम पर सांसें थामकर नजर रखे हुए हैं।

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