'30 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर', उमर अब्दुल्ला का भाजपा पर सरकार गिराने की 'गुप्त स्क्रिप्ट' का सनसनीखेज खुलासा

डल झील के किनारे सियासत का महाविस्फोट: "न बिकेंगे विधायक, न झुकेगी सरकार... बंद दरवाजों के पीछे चल रहे भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' को मुख्यमंत्री ने किया बेनकाब।"

11 Jul 2026  |  829

 

 

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सियासत में शनिवार को उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनकी चुनी हुई सरकार को गिराने और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) में फूट डालने की एक बहुत बड़ी और गहरी साजिश का सनसनीखेज आरोप मढ़ दिया। डल झील के किनारे गूंजे इस तीखे भाषण में मुख्यमंत्री ने न केवल कड़ा राजनीतिक हमला किया, बल्कि भाजपा के उस 'गुप्त ऑपरेशन' की पूरी स्क्रिप्ट को भी सार्वजनिक कर दिया, जो कथित तौर पर बंद दरवाजों के पीछे रचा जा रहा है।

मजार-ए-अनवर से गूंजी हुंकार

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी दादी बेगम अकबर जहां की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हजरतबल में अपने दादा-दादी के मजार पर आयोजित कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। भावुक और आक्रामक तेवरों के बीच अब्दुल्ला ने सीधा आरोप लगाया कि भाजपा नेशनल कांफ्रेंस के विधायकों को खरीदने और सरकार को अस्थिर करने के लिए अपने भारी-भरकम धनबल का इस्तेमाल कर रही है।

"नेशनल कांफ्रेंस को तोड़ने की हर मुमकिन कोशिशें की जा रही हैं। जब पैसे और मंत्री पद का लालच काम नहीं आया, तो भाजपा अब बंद दरवाजों के पीछे मेरे विधायकों को फुसलाने में जुटी है। उनसे कहा जा रहा है कि ‘हमारे साथ आ जाओ और हम तुम्हें राज्य का दर्जा दिला देंगे’।" — उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री (जम्मू-कश्मीर)

'सुप्रीम कोर्ट के वकील ने दिया 30 करोड़ का ऑफर'

मुख्यमंत्री ने इस 'गुप्त डील' का पर्दाफाश करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने बताया कि जम्मू क्षेत्र के नेशनल कांफ्रेंस के एक विधायक ने खुद उन्हें इस पूरी साजिश की जानकारी दी है।

अब्दुल्ला ने कहा, "भगवान गवाह है कि जम्मू के हमारे एक विधायक ने मुझे बताया कि भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी ने—जो सुप्रीम कोर्ट के नामचीन वकील भी हैं—उनसे संपर्क साधा था। उन्होंने भाजपा खेमे में शामिल होने के बदले 20 से 30 करोड़ रुपए नकद, एक कैबिनेट मंत्री का पद और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का लालच दिया। भाजपा को लगता है कि आवाम का भरोसा और हमारे विधायकों का जमीर इतना कमजोर है।"

ईमानदारी की कीमत न 20 करोड़, न 100 करोड़

भाजपा को कड़ा संदेश देते हुए उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि नेशनल कांफ्रेंस का कोई भी सिपाही खुद का सौदा नहीं करेगा। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा:

अटूट निष्ठा: "हमारी पार्टी का एक भी ऐसा विधायक नहीं है जो 20 करोड़ या 100 करोड़ रुपए के लिए अपनी ईमानदारी और कश्मीर की अवाम के भरोसे को बेच दे। हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि हमें उस ऊपर वाले (भगवान) को जवाब देना है।"

पिछले दरवाजे की एंट्री बंद: "भाजपा इस गलतफहमी में न रहे कि हम इतने कमजोर हैं कि वे पिछले दरवाजे से चोर रास्ता बनाकर सत्ता पर काबिज हो जाएंगे।"

सियासी गलियारों में हड़कंप

उमर अब्दुल्ला के इस सीधे और बेहद गंभीर आरोपों के बाद जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि कश्मीर की घाटी में भले ही सरकार बन गई हो, लेकिन सत्ता के शीर्ष पर शह और मात का यह खेल आने वाले दिनों में और ज्यादा आक्रामक रुख अख्तियार करने वाला है।

अन्य खबरें