बांकीपुर उपचुनाव में हाई-वोल्टेज ड्रामा: चारा घोटाले से जुड़े तार, तो प्रशांत किशोर के डर से बीजेपी ने आनन-फानन में बदला अपना उम्मीदवार! इनसाइड स्टोरी,,,

"नामांकन के बाद कटा टिकट, अभिषेक 'बंटी' आउट, नीरज सिन्हा इन... पारिवारिक कारण या 'घोटाले' का डर? बिहार की सियासत में छिड़ा घमासान।"

11 Jul 2026  |  714

 

 

पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर एक ऐसा जबरदस्त सियासी ड्रामा देखने को मिला है, जिसने पूरे सूबे की राजनीति में हलचल मचा दी है। नामांकन दाखिल होने के बाद पार्टी को अचानक रात-रात भर में अपना उम्मीदवार बदलने पर मजबूर होना पड़ा। गुरुवार, 9 जुलाई को गाजे-बाजे के साथ नामांकन करने वाले अभिषेक कुमार 'बंटी' ने शुक्रवार, 10 जुलाई को अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना नाम वापस ले लिया। इसके तुरंत बाद बीजेपी ने नीरज सिन्हा को अपना नया चेहरा घोषित कर दिया।

हालांकि अभिषेक कुमार ने इसके पीछे 'पारिवारिक कारणों' का हवाला दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस 'बचकाने बहाने' के पीछे की जो असली इनसाइड स्टोरी सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है।

क्या है असली वजह? चारा घोटाले से कनेक्शन!

सूत्रों और सियासी जानकारों के मुताबिक, अभिषेक कुमार 'बंटी' के अचानक पीछे हटने की असली वजह उनके परिवार का 'चारा घोटाला' से जुड़ा पुराना कनेक्शन है। बताया जा रहा है कि अभिषेक कुमार के माता-पिता दोनों का नाम बहुचर्चित चारा घोटाले में आया था।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को शुरुआत में इस बात की भनक नहीं थी। लेकिन जैसे ही यह संवेदनशील जानकारी आलाकमान के संज्ञान में आई, पार्टी के पैरों तले जमीन खिसक गई। बीजेपी को डर था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करने वाली पार्टी की इस टिकट से भारी किरकिरी हो सकती है।

प्रशांत किशोर का डर और 'जन सुराज' का तंज

इस पूरे ड्रामे के पीछे जन सुराज पार्टी के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर (PK) का खौफ भी साफ नजर आ रहा है। एनडीए खेमे को डर था कि अगर प्रशांत किशोर को इस घोटाले के कनेक्शन की भनक लग जाती, तो वह इसे चुनाव में एक बड़ा हथियार बना लेते, जिससे एनडीए की राह बेहद मुश्किल हो जाती।

मामले पर चुटकी लेते हुए प्रशांत किशोर ने शुक्रवार की रात मीडिया से कहा:

"बीजेपी अब खुद यह स्वीकार कर रही है कि वह भ्रष्ट पृष्ठभूमि वाले लोगों को मैदान में उतारती है और पकड़े जाने पर पीछे हटती है।"

वहीं, जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह ने करारा हमला बोलते हुए कहा कि प्रशांत किशोर के डर से ही बीजेपी उम्मीदवार को मैदान छोड़ना पड़ा है। बीजेपी यह मान चुकी है कि बांकीपुर की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है और एकमत से प्रशांत किशोर को अपना नेता मान रही है।

विपक्ष ने घेरा: 'कम से कम स्क्रिप्ट तो अच्छी लिखवाते'

इस सियासी ड्रामे पर कांग्रेस ने भी तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने अभिषेक कुमार के बहाने पर कटाक्ष करते हुए कहा, "पारिवारिक कारणों से नाम वापस ले रहे हैं—यह कितना बचकाना बहाना है! जिस परिवार को टिकट मिलने से खुशियों का खजाना मिला हो, वह पारिवारिक कारणों से पीछे क्यों हटेगा? बीजेपी को कम से कम अपने बहाने की स्क्रिप्ट तो किसी अच्छे लेखक से लिखवानी चाहिए थी।"

सियासी तापमान हाई: बांकीपुर का यह उपचुनाव अब महज एक सीट का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह बीजेपी की साख और प्रशांत किशोर के 'जन सुराज' के बीच सीधे शक्ति प्रदर्शन का मैदान बन चुका है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नए उम्मीदवार नीरज सिन्हा इस डैमेज कंट्रोल को संभाल पाते हैं या नहीं।

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