सोशल मीडिया कंपनियों के 'सेफ्टी दावों' की खुली पोल: टीनएजर्स के सुरक्षा फीचर्स महज छलावा; यूनिवर्सिटी रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

"सेकंडों में बायपास हो रहे इंस्टाग्राम-स्नैपचैट के सेफ्टी टूल्स... अजनबियों से बचाने का दावा करने वाले एल्गोरिदम खुद परोस रहे एडल्ट प्रोफाइल्स।"

11 Jul 2026  |  826

 

 

 

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली:

टेक दिग्गज कंपनियां भले ही बच्चों और किशोरों (टीनएजर्स) को सुरक्षित माहौल देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हों, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। Instagram, Snapchat, TikTok और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा टीनएजर्स की सुरक्षा के लिए जारी किए गए नए सेफ्टी फीचर्स पर एक हालिया रिसर्च ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की एक संयुक्त रिसर्च में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कंपनियों के ज्यादातर सेफ्टी टूल्स या तो सही तरीके से काम ही नहीं करते या उन्हें कुछ ही सेकंड में आसानी से बायपास (ठेंगा दिखाया) किया जा सकता है।

द न्यू यॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट के हवाले से सामने आई खामियों ने पैरेंट्स और साइबर एक्सपर्ट्स की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

तीन बड़े प्लेटफॉर्म्स और उनकी बड़ी नाकामियां

तथाकथित सेफ्टी फीचर्स का जब रिसर्चर्स ने कड़ा टेस्ट किया, तो तीन प्रमुख प्लेटफॉर्म्स में सुरक्षा के गंभीर लूपहोल्स (खामियां) पाए गए:

1. Snapchat: म्यूचुअल फ्रेंड्स का दावा फेल, अजनबी एडल्ट्स का सजेशन

स्नैपचैट ने दावा किया था कि टीनएजर्स के अकाउंट सिर्फ उन्हीं को दिखेंगे जो उनके म्यूचुअल फ्रेंड्स हैं। लेकिन रिसर्च में पाया गया कि यदि किसी अजनबी को टीनएजर का यूजरनेम पता हो, तो वह आसानी से उसे ढूंढ सकता है। इतना ही नहीं, स्नैपचैट का एल्गोरिदम खुद टीनएजर्स को ऐसे एडल्ट्स की प्रोफाइल सजेस्ट कर रहा था, जिनसे उनका दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं था।

2. Instagram: प्राइवेट अकाउंट के बावजूद 'Suggested for You' में अनजान पुरुष

मेटा (Meta) ने ढिंढोरा पीटा था कि 'टीन अकाउंट्स' के तहत बच्चों के प्रोफाइल डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट होंगे ताकि अनचाहे लोग उनसे संपर्क न कर सकें। टेस्ट के दौरान जब रिसर्चर्स ने एक नाबालिग बच्ची के नाम से नया अकाउंट बनाया, तो इंस्टाग्राम के 'Suggested for You' सेक्शन में लगभग सभी प्रोफाइल्स उन अनजान एडल्ट पुरुषों की थीं, जिन्हें वह बच्ची जानती तक नहीं थी।

3. YouTube: स्क्रीन टाइम लिमिट को खुद ही तोड़ने की दे रहा सलाह

यूट्यूब बच्चों की लत छुड़ाने के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और 'Take a break' का फीचर देता है। मगर रिसर्च में देखा गया कि जैसे ही 60 मिनट पूरे होते हैं, यूट्यूब स्क्रीन पर खुद ही 'Ignore limit for today' (आज के लिए लिमिट को छोड़ें) और 'Change limit' जैसे विकल्प दिखा देता है, जो बच्चों को आगे भी वीडियो देखते रहने के लिए उकसाते हैं।

जटिल मेनू में छिपाए गए हैं सेफ्टी टूल्स

रिसर्चर्स ने यह भी नोट किया कि जो थोड़े-बहुत काम के फीचर्स उपलब्ध हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म्स ने इतने जटिल (Complex) सेटिंग्स मेनू के अंदर छिपा रखा है कि एक आम माता-पिता के लिए उन्हें ढूंढ पाना और एक्टिवेट करना लगभग नामुमकिन है। कई महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर्स तो डिफॉल्ट रूप से बंद (Disabled) रहते हैं।

कंपनियों का पक्ष और एक्सपर्ट्स की चेतावनी

इस चौतरफा घिराव के बीच मेटा ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि 'टीन अकाउंट्स' लागू होने के बाद से किशोरों द्वारा सेंसिटिव कंटेंट देखने में गिरावट आई है और वे रात के वक्त इंस्टाग्राम पर कम समय बिता रहे हैं।

"सोशल मीडिया कंपनियों के ये टूल्स या तो अधूरे होते हैं या इतने उलझाऊ होते हैं कि इनका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। कंपनियाँ केवल दिखावे के टूल्स बना रही हैं, जबकि आज के समय में इन्हें और ज्यादा सख्त और फुलप्रूफ बनाने की जरूरत है।"

एनेके बफ़ोन, पूर्व साइकोलॉजिस्ट (मेटा)

बड़ा सवाल:

इस शोध ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया की भूलभुलैया में बच्चे अब भी पूरी तरह असुरक्षित हैं। टेक कंपनियों को केवल कागजी या पीआर (PR) दावों से हटकर जमीनी स्तर पर तकनीकी बदलाव करने होंगे, ताकि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से वाकई बचाया जा सके।

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