मुजफ्फरपुर। बिहार में नशीली दवाओं के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान पुलिस ने एक लग्जरी गाड़ी से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली सूइयों (इंजेक्शन) की खेप बरामद की है। इस मामले में पुलिस ने चार शातिर तस्करों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, जो इस प्रतिबंधित खेप को पटना से वाया मुजफ्फरपुर होते हुए नेपाल ले जा रहे थे।
गुप्त सूचना पर फोरलेन पर बिछाया गया जाल
मिली जानकारी के अनुसार, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (पटना) को एक विश्वसनीय इनपुट मिला था कि नशीली दवाओं की एक बड़ी खेप नेपाल भेजी जा रही है। इस गुप्त सूचना के आधार पर सदर थाने की पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न्यू फोरलेन मधुबनी मादापुर चौबे के समीप सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध टाटा सुमो विक्टा गाड़ी को रोका गया।
तलाशी में मिला अवैध दवाओं का जखीरा
जब पुलिस टीम ने उक्त चार पहिया वाहन की सघन तलाशी ली, तो उसमें छुपाकर रखी गई 6300 एम्प्यूल (पीस) प्रतिबंधित नशीली सूइयां बरामद हुईं। इसके साथ ही तस्करों के पास से 4 मोबाइल फोन और 57,800 रुपये नकद भी जब्त किए गए। बरामद खेप की भारी मात्रा को देखते हुए पुलिस का अनुमान है कि यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा है।
गिरफ्तार तस्करों की हुई पहचान
पुलिस की गिरफ्त में आए तस्करों की पहचान सीमावर्ती जिलों के शातिरों के रूप में हुई है, जिनमें शामिल हैं:
आजाद अंसारी (हरसिद्धि, पूर्वी चंपारण)
चुमन राय (हरसिद्धि, पूर्वी चंपारण)
मो. सलीम (रक्सौल, पूर्वी चंपारण)
सोनू कुमार उर्फ राहुल (रक्सौल, पूर्वी चंपारण)
पटना बना नशीली दवाओं का बड़ा केंद्र पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राजधानी पटना नशीली दवाओं और इंजेक्शन के अवैध कारोबार का एक बड़ा हब बन चुकी है। नेपाल के तस्कर नियमित रूप से पटना से इन प्रतिबंधित दवाओं की खेप उठाते हैं और विभिन्न रास्तों से इन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार पहुंचाते हैं।
कॉल डिटेल खंगालने पर सामने आए कई बड़े नाम
सदर थाना पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोनों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को बारीकी से खंगाला है। इस जांच में पुलिस के हाथ कई महत्वपूर्ण सुराग और तस्करी नेटवर्क से जुड़े दर्जनों संदिग्ध नंबर लगे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन नंबरों के आधार पर बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को ट्रैक किया जा रहा है, और जल्द ही इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से जारी है।