समझौता टूटा, महायुद्ध भड़का: ईरान का आरोप—'अमेरिका ने तोड़ी MOU की शर्तें, इसलिए बंद किया होर्मुज'; US के ताबड़तोड़ हमलों से खाड़ी देशों में हाई अलर्ट

हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास का बड़ा खुलासा—60 दिनों के लिए दी थी सुरक्षित रास्ते की गारंटी, पर अमेरिका मुकरा; पलटवार में अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले—'ईरान को चुकानी होगी भारी कीमत'।

12 Jul 2026  |  863

 

 

नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी सैन्य गतिरोध के बीच एक नया और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ईरान ने वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद करने के अपने कदम को जायज ठहराते हुए अमेरिका पर एक द्विपक्षीय समझौते (MOU) के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया है। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कतर में मिसाइल व ड्रोन हमलों का हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

ईरान का दावा: 'MOU की शर्तें तोड़ीं, तो हम क्यों मानें?'

हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के आधिकारिक सोशल मीडिया (X) हैंडल से जारी बयान ने इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते (MOU) का पालन दोनों पक्षों की पारस्परिक जिम्मेदारी होती है। एकतरफा प्रतिबद्धता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

क्या था वह गुप्त समझौता (MOU)? ईरानी दूतावास के मुताबिक, इस समझौते के तहत ईरान फारस की खाड़ी से लेकर ओमान सागर तक बिना किसी शुल्क (फ्री ऑफ चार्ज) के व्यावसायिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने पर सहमत हुआ था। यह गारंटी 60 दिनों के लिए दी गई थी, लेकिन अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी न करने के बाद ईरान ने इसे रद्द कर दिया।

तनाव की क्रोनोलॉजी: नियम उल्लंघन और फायरिंग

ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा साइप्रस के झंडे वाला कंटेनर जहाज तय समुद्री नियमों का पालन नहीं कर रहा था। बार-बार चेतावनी देने और नेविगेशन सिस्टम बंद रखने के बाद, ईरानी नौसेना ने चेतावनी के तौर पर फायरिंग कर जहाज को रोका था। ईरान ने दोटूक कहा है कि जब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक किसी भी जहाज को यहाँ से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अमेरिकी सेना का इस हफ्ते का तीसरा बड़ा हमला

ईरान की इस कार्रवाई के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त निर्देश पर 'US सेंट्रल कमांड' (CENTCOM) ने इस सप्ताह का तीसरा और सबसे घातक सैन्य हमला शुरू कर दिया। अमेरिका ने ईरान के कई तटीय इलाकों और सैन्य ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की है, जहाँ लगातार धमाकों की खबरें आ रही हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है, "ईरान ने यह कदम उठाकर बहुत बड़ी गलती की है और एक गलत फैसला लिया है, अब उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।" अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी हमले में कंटेनर जहाज के इंजन रूम में भीषण आग लग गई है और नागरिक चालक दल का एक सदस्य अब भी लापता है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल बाजार पर मंडराया खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के तेल और गैस व्यापार का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी और अमेरिका-ईरान का यह सीधा सैन्य टकराव लंबा खिंचा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लग जाएगी। फिलहाल पूरी खाड़ी युद्ध के मुहाने पर खड़ी है।

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