नीतियों के फेर में फंसा बिहार का औद्योगिक विकास: ₹10,000 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर लगा 'सरकारी ब्रेक'

BIIPP-2025 और सरकारी 'संकल्प' के अंतर्विरोध ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशन; पाइप-लाइन इंडस्ट्रीज के प्रस्ताव निरस्त होने से अधर में लटका हजारों करोड़ का निवेश।

12 Jul 2026  |  978

 

 

पटना:

बिहार में उद्योग लगाने और नए निवेश को आकर्षित करने के सरकारी दावों को खुद व्यवस्था के अंतर्विरोधों ने बड़ा झटका दिया है। राज्य में करीब 10,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश प्रस्ताव नियमों और सरकारी 'संकल्प' के पेच में फंस गए हैं। 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025' (BIIPP-2025) का लाभ लेने की उम्मीद जताए बैठे उद्यमी अब इस प्रशासनिक उलझन के कारण बेहद परेशान हैं।

यह पूरा संकट उन पाइप-लाइन इंडस्ट्रीज (वे इकाइयां जो स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं) के सामने खड़ा हुआ है, जिन्होंने नई नीति (BIIPP-2025) में शिफ्ट होने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन तकनीकी खामियों का हवाला देकर उनके प्रस्तावों को निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा, लगभग 2,000 करोड़ रुपये के अन्य निवेश प्रस्ताव भी इसी उम्मीद और असमंजस के बीच अधर में लटके हुए हैं।

कहाँ है पेंच? समझिए नियमों का अंतर्द्वंद्व

दरसअल, उद्योग विभाग की नीति और उसके बाद जारी किए गए 'संकल्प' (Resolution) के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है, जिसने निवेशकों को चक्रव्यूह में फंसा दिया है:

BIIPP-2025 का प्रविधानविभाग का नया 'संकल्प' (नियम)
जिन इकाइयों ने BIIPP-2016 के तहत आवेदन किया था, लेकिन अभी तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू नहीं किया है और जिन्हें स्टेज-1 क्लीयरेंस, वित्तीय प्रोत्साहन या उत्पादन तिथि की स्वीकृति नहीं मिली है, वे नया आवेदन देकर BIIPP-2025 का लाभ ले सकती हैं।ऐसी औद्योगिक इकाइयां, जिन्हें BIIPP-2016 या किसी अन्य औद्योगिक नीति के अंतर्गत किसी भी स्तर पर स्वीकृति प्राप्त है, वे BIIPP-2025 के अंतर्गत किसी भी प्रकार के लाभ/प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होंगी।

असमंजस की स्थिति: एक तरफ जहां नीति (BIIPP-2025) शर्तों के आधार पर नई व्यवस्था में आने का रास्ता खोलती है, वहीं दूसरी तरफ विभाग का 'संकल्प' किसी भी स्तर पर स्वीकृति पाने वाली इकाइयों के रास्ते पूरी तरह बंद कर देता है।

'रेड कार्पेट' के दावों के बीच 'रेड टेपिज़्म' का दर्द

उद्यमियों का दबी जुबान में कहना है कि बिहार में उद्योगों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा खुद यहां की प्रशासनिक व्यवस्था ही है। नियम-कायदों की पेचीदगियां और फाइलों के अवरोध इतने ज्यादा हैं कि जमीन पर उत्पादन शुरू होने से पहले ही निवेशक हांफने लगते हैं।

गौरतलब है कि साल 2025 में जब यह प्रोत्साहन पैकेज संशोधित स्वरूप में आया था, तब उद्योग विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ने उद्यमियों को मौखिक रूप से इस नई नीति से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। लेकिन बाद में जारी लिखित 'संकल्प' ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

एसोसिएशन ने की उद्योग मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

इस गंभीर संकट को देखते हुए बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (BIA) के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उद्यमियों का कहना है कि अगर समय रहते इस नीतिगत अंतर्विरोध को दूर नहीं किया गया, तो बिहार आने वाला एक बड़ा निवेश हाथ से निकल सकता है। हालांकि, सरकार और विभाग की ओर से अभी तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जा सका है।

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