एमपी के मिड-डे मील में बड़ा खेल: काम कर रहे असली रसोइए, मानदेय जा रहा 'फर्जी' खातों में! ई-केवाईसी और एफआईआर के सख्त निर्देश

55 लाख बच्चों का खाना बनाने वाले रसोइयों के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका; एक ही रसोइया कई स्कूलों में दर्ज, सरकार ने दिए ई-केवाईसी और एफआईआर के सख्त निर्देश।

12 Jul 2026  |  870

 

 

भोपाल:

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा आठवीं तक के 55 लाख से अधिक बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) तैयार करने वाले रसोइयों के मानदेय भुगतान में एक बड़े घोटाले की आशंका सामने आई है। 'पीएम पोषण पोर्टल' के माध्यम से होने वाले भुगतान की समीक्षा के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पोर्टल पर रसोइयों के नाम और पते तो सही हैं, लेकिन दर्ज बैंक खाते किसी और के हैं। इसका सीधा मतलब है कि चूल्हा-चौका कोई और संभाल रहा है और मेहनत की कमाई किसी दूसरे के खातों में ट्रांसफर की जा रही है।

इतना ही नहीं, सरकारी प्रतिवेदन में यह बात भी सामने आई है कि एक ही रसोइए का पंजीयन अलग-अलग स्कूलों में दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर एक बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।

 ऐक्शन में सरकार: भौतिक सत्यापन के निर्देश, गड़बड़ी मिलने पर दर्ज होगी FIR

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल ने संयुक्त रूप से सभी जिला पंचायत सीईओ और स्कूल प्राचार्यों (प्रधानाध्यापकों) को रसोइयों का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

20 जुलाई तक की डेडलाइन: सभी जिम्मेदार अधिकारियों को 20 जुलाई तक अपनी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन जमा करनी होगी।

होगी जेल की हवा: जांच के दौरान यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है, तो दोषी अधिकारियों, एजेंसियों या व्यक्तियों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

 अब ई-केवाईसी और बैंक खातों का होगा मिलान, रुक जाएगा फर्जी भुगतान

इस व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने नए नियम तय कर दिए हैं:

अनिवार्य वेरिफिकेशन: अब सभी रसोइयों का ई-केवाईसी (e-KYC) और समग्र आईडी सत्यापन कराया जाएगा। इसके साथ ही उनके बैंक खातों का भी पूरी तरह मिलान किया जाएगा। पोर्टल पर शत-प्रतिशत सही जानकारी अपडेट होने के बाद ही मानदेय की राशि जारी होगी।

अतिरिक्त रसोइयों पर रोक: यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइए पंजीकृत पाए जाते हैं, तो शासन स्तर से उनका भुगतान नहीं किया जाएगा। ऐसे अतिरिक्त मानदेय की पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी को खुद उठानी होगी।

विकासखंड स्तर पर जांच: ब्लॉक स्तर पर 'विकासखंड समन्वयक' (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर) को पूरे रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 निगरानी के लिए बनाई गई 'डिजिटल दीवार'

भविष्य में ऐसी किसी भी धांधली को रोकने के लिए मध्याह्न भोजन की निगरानी प्रणाली को डिजिटल रूप से बेहद मजबूत कर दिया गया है। इसके तहत 'एजुकेशन पोर्टल' की लॉगिन आईडी को सीधे 'पीएम पोषण पोर्टल' से लिंक कर दिया गया है। अब स्कूल के प्रधानाध्यापक अपनी आधिकारिक यूजर आईडी से लॉगिन करके ही डेटा देख सकेंगे। साथ ही विकासखंड समन्वयकों के लिए भी एक विशेष पंजीकृत लॉगिन आईडी को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि हर एक एंट्री पर पैनी नजर रखी जा सके।

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