'स्पाई पैराडाइज' जापान में रूसी जासूसों का बड़ा जाल! पश्चिमी देशों से खदेड़े गए खुफिया अफसर अब टोक्यो से चला रहे हैं सीक्रेट मिशन

यूक्रेन का सनसनीखेज दावा— रूसी मिसाइलों और ड्रोन में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं 90% जापानी पुर्जे!

13 Jul 2026  |  1118

 

 

टोक्यो/वॉशिंगटन:

यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की खुफिया गतिविधियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन पर हमले के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका से खदेड़े गए दर्जनों रूसी खुफिया अधिकारी (जासूस) अब जापान को अपना नया ठिकाना बना चुके हैं। रूस का मकसद जापान की अत्याधुनिक तकनीक और संवेदनशील कल-पुर्जे हासिल करना है, ताकि उनका इस्तेमाल अपने मिसाइल, ड्रोन और घातक हथियार बनाने में किया जा सके।

यूक्रेन का दावा: रूसी हथियारों में 90% जापानी तकनीक

यूक्रेनी अधिकारियों ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि युद्ध में यूक्रेन पर दागी जा रही रूसी मिसाइलों और ड्रोनों में करीब 90% पुर्जे जापान में बने हैं।

**कानूनी पेच: ** ये पुर्जे असल में नागरिक (Civilian) इस्तेमाल के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन रूसी वैज्ञानिक चालाकी से इन्हें सैन्य हथियारों में फिट कर रहे हैं। आम उपयोग की वस्तु होने के कारण इनकी बिक्री और निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना बेहद मुश्किल हो रहा है।

टोक्यो में सक्रिय है रूस की सीक्रेट '20वीं डायरेक्टरेट'

रिपोर्ट में पश्चिमी देशों के मौजूदा और पूर्व खुफिया अधिकारियों के हवाले से रूस के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया है:

बदला हुआ रूप: रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी की '20वीं डायरेक्टरेट' नाम की यूनिट इस समय टोक्यो में सक्रिय है। इसके एजेंट बिजनेसमैन या राजनयिक (Diplomat) बनकर जापानी कंपनियों से संपर्क साधते हैं।

एयरोफ्लोट कनेक्शन: इस नेटवर्क का मुख्य सरगना रूस की सरकारी एयरलाइन एयरोफ्लोट (Aeroflot) के कर्मचारी के रूप में अपनी पहचान छिपाकर काम कर रहा था। गौरतलब है कि सोवियत संघ के जमाने से ही रूस इस एयरलाइन का इस्तेमाल अपने जासूसों को कवर देने के लिए करता आ रहा है।

जापान को क्यों चुना? 'कमजोर काउंटर-इंटेलिजेंस' का फायदा

ग्लोबल सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स लंबे समय से जापान को 'स्पाई पैराडाइज' (जासूसों के लिए स्वर्ग) कहते आए हैं। इसके पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

जापान के पास अब तक कोई अलग विदेशी खुफिया एजेंसी नहीं थी।

वह खुफिया जानकारियों के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर रहता आया है।

यूरोप की तुलना में यहाँ का काउंटर-इंटेलिजेंस सिस्टम थोड़ा धीमा रहा है, जिसका फायदा रूसी जासूसों ने उठाया।

एक्शन में जापान: जासूसों पर नकेल कसने की तैयारी

यूक्रेन द्वारा सबूत और दस्तावेज सौंपे जाने के बाद अब जापान सरकार भी अलर्ट मोड पर आ गई है। हालांकि शुरुआत में जापान की प्रतिक्रिया धीमी थी, लेकिन अब सरकार अपनी खुफिया व्यवस्था को पूरी तरह से री-मॉडल कर रही है।

जापान के बड़े सुरक्षा कदमविवरण
नए विभागों का गठनदेश में 'नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल' और 'नेशनल इंटेलिजेंस ब्यूरो' बनाने का कानून पास किया गया है।
नया कड़ा कानून (2026)विदेशी जासूसी और डेटा चोरी पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए जापान 2026 में नया एंटी-एस्पियोनेज (एंटी-जासूसी) कानून लागू करने जा रहा है।

जापान अब पश्चिमी देशों के साथ मिलकर एक सख्त सप्लाई-चेन मैकेनिज्म बना रहा है, ताकि उसकी संवेदनशील तकनीक किसी भी तरह से रूस के सैन्य गोदामों तक न पहुंच सके।

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