सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: तमिलनाडु में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर जारी किया नोटिस; कहा— याचिका के दायरे से बाहर जाकर मद्रास हाई कोर्ट ने दिया था फैसला, 10 साल से अधिक उम्र के गोवंश पर कानूनन रोक नहीं।

13 Jul 2026  |  1029

 

 

नई दिल्ली / चेन्नई

तमिलनाडु में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को अंतरिम रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह कदम तमिलनाडु सरकार की उस अपील पर उठाया है, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को कानून और याचिका के मूल दायरे से बाहर बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद फिलहाल हाई कोर्ट का पूर्ण प्रतिबंध संबंधी निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक हाई कोर्ट के फैसले के प्रभाव (Operation) पर रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की दलीलें

मामले की पैरवी करते हुए तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दो बेहद महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु रखे:

याचिका के दायरे से बाहर का फैसला: सरकार ने दलील दी कि मूल याचिका केवल बकरीद के त्योहार के मौके पर वैध बूचड़खानों (Slaughterhouses) के बाहर गाय और बछड़ों की कथित बलि रोके जाने के मुद्दे तक ही सीमित थी। लेकिन मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस सीमित मसले से आगे बढ़ते हुए पूरे राज्य में गायों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दे दिया, जो याचिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

मौजूदा राज्य कानून का हवाला: सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य के वर्तमान नियमों के तहत 10 वर्ष से अधिक आयु के गोवंश की हत्या पर कानूनन कोई रोक नहीं है। हाई कोर्ट का नया आदेश इस मौजूदा कानूनी व्यवस्था का उल्लंघन करता है।

क्या था मद्रास हाई कोर्ट का आदेश?

इससे पहले, इसी वर्ष 27 मई को मद्रास हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था। इसमें अदालत ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 (कृषि और पशुपालन का संगठन) और 1976 में तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी किए गए एक पुराने आदेश का हवाला दिया था। हाई कोर्ट ने राज्य प्रशासन को कड़े निर्देश दिए थे कि बकरीद सहित किसी भी दिन राज्य में गाय और बछड़ों की हत्या न होने दी जाए।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद तमिलनाडु में फिलहाल पुरानी कानूनी स्थिति बहाल हो गई है। अब मामले की अगली सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत विस्तृत कानूनी तर्कों की समीक्षा करेगी और यह अंतिम फैसला सुनाएगी कि क्या मद्रास हाई कोर्ट का यह निर्देश संवैधानिक और कानूनी रूप से सही था या नहीं।

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