कोलकाता एयरपोर्ट की 136 साल पुरानी 'बांकरा मस्जिद' में एंट्री बंद; मुस्लिम समुदाय में नाराजगी, सिर्फ सरकारी पहचान पत्र के भरोसे सुरक्षा से समझौता नहीं

BCAS की आपत्ति के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी का बड़ा फैसला; बीजेपी बोली— रनवे विस्तार के लिए शिफ्ट हो मस्जिद।

13 Jul 2026  |  1030

 

 

कोलकाता

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ऑपरेशनल एरिया (परिचालन क्षेत्र) में स्थित 136 साल पुरानी ऐतिहासिक बांकरा मस्जिद (गौरीपुर जामा मस्जिद) में आम जनता और नमाजियों के प्रवेश पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी गई है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने रविवार (12 जुलाई) को स्पष्ट किया कि केवल सरकारी पहचान पत्र (आधार कार्ड) के आधार पर हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में प्रवेश की अनुमति देना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा है। इस फैसले के बाद से स्थानीय मुस्लिम समुदाय और राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ गई है।

शुरुआत में शनिवार को अधिकारियों ने कहा था कि बारिश के कारण मस्जिद की ओर जाने वाली सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसकी मरम्मत के लिए दो दिनों तक आवागमन बंद रहेगा। लेकिन रविवार को सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद इस आदेश को अनिश्चितकालीन पाबंदी में बदल दिया गया।

ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) की आपत्ति के बाद फैसला

कोलकाता एयरपोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सड़क मरम्मत का काम तो पूरा कर लिया गया है, लेकिन विमानन सुरक्षा की शीर्ष संस्था 'ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी' (BCAS) द्वारा उठाई गई गंभीर आपत्तियों के कारण फिलहाल मस्जिद में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्या थी पुरानी व्यवस्था? शुक्रवार तक एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ (CISF) के समक्ष अपना आधार कार्ड प्रस्तुत कर प्रतिदिन लगभग 70 नमाजी अलग-अलग समय पर मस्जिद में प्रवेश कर रहे थे।

वर्तमान स्थिति: रविवार को जब नमाजी गेट नंबर 8 पर पहुंचे, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की तरफ से गेट खोलने का कोई नया आदेश नहीं मिला है। अब अधिकारी इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि क्या कोई नया 'पास सिस्टम' लागू किया जाए या प्रवेश को स्थायी रूप से बंद रखा जाए।

मुस्लिम समुदाय और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जताई नाराजगी

इस अचानक आए फैसले से नमाजियों और स्थानीय लोगों में काफी असंतोष है। नमाजी अबुल कलाम ने सवाल उठाया कि पहले भी रनवे और सड़कों की मरम्मत होती रही है, लेकिन नमाज कभी नहीं रोकी गई; प्रशासन स्थिति को स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा है?

वहीं, पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने इस मामले में दखल दिया है। मस्जिद के हितधारकों में शामिल चौधरी ने एयरपोर्ट निदेशक को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द यह तारीख साफ करे कि नमाजियों को दोबारा प्रवेश कब मिलेगा।

राजनीतिक बयानबाजी तेज: रनवे विस्तार और शिफ्टिंग पर छिड़ी बहस

इस संवेदनशील मुद्दे पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के बयान भी सामने आए हैं, जिससे मामला राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है:

सौरव सिकदर (स्थानीय BJP विधायक): "इस मस्जिद के कारण एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे का नियोजित विस्तार रुका हुआ है। अधिकारियों ने पूर्व में मस्जिद समिति को वैकल्पिक स्थान देने की कई बार पेशकश की थी, लेकिन समिति स्थानांतरित होने को तैयार नहीं हुई।"

सुकांत मजूमदार (केंद्रीय मंत्री): "पहले तुष्टीकरण की राजनीति के चलते सरकारें कड़े कदम उठाने से कतराती थीं, लेकिन हमारी सरकार इसमें विश्वास नहीं करती। देश की सुरक्षा और विकास के लिए मस्जिद को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने में कोई बड़ी बात नहीं है।"

फिलहाल, सुरक्षा और आस्था के इस संवेदनशील मोड़ पर एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अगले कड़े दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही हैं।

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