कटनी / जबलपुर
प्राकृतिक आपदाओं और सीमित संसाधनों के कारण पारंपरिक खेती में लगातार नुकसान झेल रहे कटनी और जबलपुर जिले के किसानों के लिए राहत की एक बड़ी बौछार आई है। क्षेत्र के कृषि विकास को नई रफ्तार देने के लिए करीब 1,432.77 करोड़ रुपये की लागत वाली 'बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना' को आधिकारिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जल प्रबंधन पर आधारित यह योजना न केवल खेतों की प्यास बुझाएगी, बल्कि ग्रामीण इकॉनमी की पूरी तस्वीर बदलने का दम रखती है। प्रशासन ने निर्माण एजेंसी को काम जल्द शुरू कर इसे वर्ष 2029 तक हर हाल में पूरा करने का कड़ा लक्ष्य दिया है।
परियोजना का तकनीकी ढांचा और क्षमता
यह परियोजना इंजीनियरिंग और आधुनिक सिंचाई तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण होगी:
जल उद्वहन (Water Lift): मुख्य जल स्रोत से 17.35 क्यूमेक पानी का उद्वहन (लिफ्ट) किया जाएगा।
बिजली की खपत: इस विशाल उद्वहन प्रणाली को संचालित करने के लिए 25.15 मेगावाट विद्युत क्षमता का उपयोग होगा।
सटीक वितरण: पाइपलाइन और माइक्रो-इरिगेशन तकनीक के जरिए पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा ताकि बर्बादी न हो।
किसे कितना मिलेगा लाभ? 183 गांवों का पूरा ब्योरा
इस महापरियोजना के पूरा होने पर दोनों जिलों की 46,716 हेक्टेयर कृषि भूमि सीधे सिंचाई नेटवर्क से जुड़ जाएगी। इसका मुख्य फायदा कटनी जिले को मिलेगा, जबकि जबलपुर की भी एक बड़ी तहसील इससे निहाल होगी।
| जिला / तहसील | लाभान्वित गांवों की संख्या | सिंचित होने वाला कुल क्षेत्र (हेक्टेयर में) |
|---|---|---|
| कटनी जिला (कुल) | 167 गांव | 44,334 हेक्टेयर |
| ↳ बहोरीबंद तहसील | 95 गांव | 22,103 हेक्टेयर |
| ↳ स्लीमनाबाद तहसील | 48 गांव | 15,303 हेक्टेयर |
| ↳ रीठी तहसील | 22 गांव | 6,314 हेक्टेयर |
| ↳ कटनी तहसील | 02 गांव | 613 हेक्टेयर |
| जबलपुर जिला (कुल) | 16 गांव | 2,383 हेक्टेयर |
| ↳ मझौली तहसील | 16 गांव | 2,383 हेक्टेयर |
| कुल योग (Grand Total) | 183 गांव | 46,716 हेक्टेयर |
एक फसल के संकट से तीन फसलों के सुनहरे सफर तक
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पानी खेतों तक पहुंचते ही इस पूरे बेल्ट में खेती का ढर्रा पूरी तरह बदल जाएगा।
फसलों का विविधीकरण: अभी तक पानी की कमी के कारण किसान साल में बमुश्किल एक ही फसल (ज्यादातर मानसून आधारित) ले पाते थे। लेकिन अब रबी और खरीफ, दोनों मुख्य सीजन में पर्याप्त पानी मिलने से किसान साल में दो से तीन फसलें आसानी से ले सकेंगे।
किसान अब गेहूं, धान और चना जैसी पारंपरिक फसलों के चक्र से बाहर निकलकर सब्जियां, दलहन, तिलहन और अन्य नकदी फसलों (Cash Crops) के साथ-साथ बड़े पैमाने पर बागवानी (Horiticulture) भी कर सकेंगे। इससे जोखिम कम होगा और किसानों की आमदनी में बंपर इजाफा होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख, रुकेगा पलायन
बहोरीबंद परियोजना सिर्फ खेतों की हरियाली तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह ग्रामीण समाज के लिए समृद्धि का द्वार खोलेगी:
स्थानीय रोजगार: निर्माण कार्य शुरू होते ही हजारों स्थानीय मजदूरों और तकनीकी विशेषज्ञों को रोजगार मिलेगा।
इंडस्ट्रियल ग्रोथ: कृषि उत्पादन बढ़ते ही क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों (Food Processing Units) और कृषि आधारित लघु उद्योगों की बाढ़ आएगी।
पलायन पर रोक: गांव में ही सालभर खेती और रोजगार के नए अवसर मिलने से रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन काफी हद तक रुक जाएगा।
निष्कर्ष: वर्ष 2029 कटनी और जबलपुर के कृषि इतिहास का एक नया टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है। जब बहोरीबंद परियोजना का पानी पहली बार खेतों की मिट्टी को छुएगा, तब वह सिर्फ पानी नहीं होगा, बल्कि हजारों किसान परिवारों के आत्मनिर्भर और समृद्ध होने की एक नई इबारत होगी।